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गर्ल्स हॉस्टल है या ‘चिड़ियाघर’, कभी कुत्ते दौड़ाते कभी बंदर

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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन की अनदेखी से गर्ल्स हॉस्टल ‘चिड़ियाघर’ बन गया है। पूरे परिसर में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक है। इनके दौड़ाने से तीन छात्राओं का गिरने से फ्रैक्चर भी हो चुका है। गर्ल्स हॉस्टल की वार्डेन प्रोफेसर संतोष अरोरा ने छात्राओं की समस्या को देखते हुए कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय को पत्र लिखकर बंदर और कुत्तों से निजात दिलाने की मांग की है।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के मैत्रेयी गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली करीब 400 छात्राएं आवारा कुत्तों और बंदरों के आतंक से परेशान हैं। पूरे दिन यह कुत्ते और बंदर हॉस्टल परिसर में उत्पात मचाते हैं। कभी कुत्ते किसी छात्रा को दौड़ा लेते हैं तो कभी बंदर किसी को दौड़ाते हैं। इसके चलते कई छात्राएं गिरकर चोटिल हो चुकी हैं और तीन छात्राओं का गिरकर फ्रैक्चर भी हो गया है। आवारा कुत्ते छात्राओं के जूते-चप्पल काट देते हैं, वहीं बंदर कमरों में घुसकर कभी कपड़े उठा ले जाते हैं तो कभी फाड़ देते हैं।
कई पत्र लिखने पर भी सुनवाई नहीं
छात्राओं की शिकायत पर वार्डेन प्रोफेसर संतोष अरोरा ने इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन को कई पत्र लिखे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने पहला पत्र 10 मई, दूसरा 22 मई और अब तीसरा पत्र चार सितंबर को लिखा है। तीनों ही बार पत्र मिलने पर कुलसचिव ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर कुत्ते और बंदर पकड़वाने को कहा लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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हॉस्टल में बंदर और कुत्तों के चलते छात्राएं परेशान हैं। बंदर तो कई बार छात्राओं के कपड़े भी उठा ले जाते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए नगर आयुक्त को पत्र लिखा गया है। - प्रो. एके जैतली, चीफ वार्डेन, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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