बरेली। बीएड में गरीब सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण देने का मामला शासन में अटक गया है। 15 जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते शासन ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पत्र को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ऐसे में इस सत्र में ईडब्ल्यूएस (गरीब सवर्ण आरक्षण) कोटे के तहत एडमिशन की उम्मीद लगाए बैठे छात्र-छात्राओं की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
इस बार रुहेलखंड विश्वविद्यालय को पूरे प्रदेश में बीएड की प्रवेश प्रक्रिया कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके तहत प्रदेश भर के महाविद्यालयों में करीब 2.13 लाख सीटों पर विभिन्न चरणों में एडमिशन प्रक्रिया 15 जुलाई पूरी कर ली गई है। सुप्रीम कोर्ट से भी प्रवेश प्रक्रिया को 15 जुलाई तक ही पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। इसी बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने गरीब सवर्ण आरक्षण को लागू करने के आदेश दिए। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में इसके आदेश 14 जुलाई को पहुंचे तो विश्वविद्यालय ने भी इसे लागू करने पर सहमति जताई। लेकिन प्रवेश प्रक्रिया में सिर्फ एक दिन बाकी होने के चलते गरीब सवर्ण के तहत एडमिशन के लिए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जरूरी था। लिहाजा इसकी अनुमति के लिए विश्वविद्यालय ने शासन को तत्काल पत्र भेज दिया लेकिन डेढ़ माह बीतने के बावजूद ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत एडमिशन के लिए शासन से अब तक कोई दिशानिर्देश नहीं मिले हैं। शासन में यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़े होने के चलते अब यही माना जा रहा है कि इस सत्र में बीएड में ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत एडमिशन मुश्किल हैं। इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है, जिसमें एडमिशन प्रक्रिया 15 जुलाई तक ही पूरे करने के निर्देश हैं।
ईडब्ल्यूएस कोटे के एडमिशन के लिए शासन को प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पत्र लिखा था। शासन से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। बिना शासन के आदेश विश्वविद्यालय इस पर कोई निर्णय नहीं ले सकता।
- प्रो. बीआर कुकरेती, राज्य समन्वयक, बीएड प्रवेश प्रक्रिया