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साहब! फिर दोस्ती का ‘धर्म’ निभाया.. छात्र को नापा पर कॉलेज को बचाया

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बरेली। आखिरकार तमाम दांवपेंच के बावजूद डीआईओएसस अपने दोस्त के बेटे अर्पित गंगवार को बचाने में नाकाम रहे। करीब डेढ़ महीने तक चली जांच के बाद यूपी और सीबीएसई दोनों बोर्र्ड से हाईस्कूल की परीक्षा देने के मामले में उसे दोषी करार देते हुए मेधावियों की सूची से उसका नाम हटाने और बोर्ड नियमों के तहत उस पर कार्रवाई करने की संस्तुति की है। हालांकि यह फर्जीवाड़ा कराने वाले आरोपी छात्र की मां के कॉलेज पर कार्रवाई करने के बारे में उन्होंने जांच रिपोर्ट में कोई टिप्पणी नहीं की है।
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इस मामले की जांच जीआईसी के प्रिंसिपल रमेश वर्मा को दी गई थी। उन्होंने डीआईओएस को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में नवाबगंज के अर्पित गंगवार को यूपी और सीबीएसई दोनों की परीक्षा देने के मामले में दोषी करार दिया है। रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया है कि जांच में बेदी स्कूल ने तो पूरा सहयोग किया लेकिन एसएसटी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ने 30 दिन का समय मांगा। इसकी सूचना डीआईओएस को दी गई। इसके बाद सात अगस्त को इस कॉलेज का निरीक्षण कर दस्तावेज मांगे गए तब भी दस्तावेज नहीं दिए गए। जांच प्रक्रिया बाधित करने पर कार्रवाई की चेातवनी दी गई तो उन्होंने अभिलेख देने के लिए 30 अगस्त तक का समय मांगा। 24 अगस्त को उन्होंने अभिलेख मुहैया कराए तो उनका मिलान किया गया। इससे अर्पित गंगवार का इसी वर्ष दो बोर्ड से परीक्षा देने की पुष्टि हुई।
जीआईसी प्रिंसिपल की रिपोर्ट डीआईओएस ने 26 अगस्त को यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय सचिव और सीबीएसई बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक को भेज दी है। उन्होंने अर्पित का परीक्षा परिणाम निरस्त करने के साथ ही उसका नाम मुख्यमंत्री मेधावी सम्मान की सूची से हटाने की भी संस्तुति की है।
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बदलेगी मेरिट लिस्ट
अर्पित के फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद यूपी बोर्ड की जिला टॉपर की लिस्ट से उसका नाम हटेगा। जिले में अर्पित गंगवार छठे नंबर के टॉपर था और यूपी टॉपर्स में उसका नाम 248वें नंबर पर दर्ज है। उसका नाम हटाने के बाद अब मेरिट लिस्ट संशोधित की जाएगी। 7वें स्थान का टॉपर छठें नंबर पर होगा और टॉप टेन की सूची में भी नया नाम दर्ज होगा।
जांच रिपोर्ट में जिक्र.. सच निकली अमर उजाला की खबर
अमर उजाला ने इस प्रकरण का खुलासा किया था। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि अमर उजाला की खबर पूरी तरह सच निकली। हालांकि डीआईओएस अपने दोस्त तुलाराम के बेटे को बचाने में लगे रहे। पहले जांच अधिकारी नियुक्त नहीं किया फिर जांच प्रभावित करने को कालेज को दस्तावेज सौंपने के लिए 30 दिन का समय भी दे दिया। यहीं नहीं जांच चलने के बावजूद अर्पित का नाम मुख्यमंत्री सम्मान के लिए भेज दिया। जांच प्रभावित करने के मामले में उनके खिलाफ अपर शिक्षा निदेशक ने जेडी को जांच सौंपी है।
कॉलेज को किया जांच के दायरे से बाहर
अर्पित गंगवार अपनी मां गुड्डी देवी और पिता तुलाराम के स्कूल में ही परीक्षा देकर जिले के टॉपर बने जबकि सीबीएसई के बेदी इंटरनेशनल स्कूल से उसे सिर्फ 45 प्रतिशत मार्क्स मिले। इस फर्जीवाड़े पर नवाबगंज के एसएसटी कॉलेज के खिलाफ भी जांच कराकर कार्रवाई की जानी थी, लेकिन उसे मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई से बचाने के लिए जांच में इस बिन्दु को शामिल नहीं किया गया। इस मामले में पक्ष लेने के लिए डीआईओएस को फोन किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव ही नहीं की।

यूपी और सीबीएसई दोनों बोर्ड से परीक्षा देने के मामले की जांच में अर्पित गंगवार दोषी मिला है। नियमानुसार परीक्षा परिणाम निरस्त कर मेधावी की सूची से नाम हटाए जाने की संस्तुति की है। - रमेश वर्मा, जांच अधिकारी, प्रधानाचार्य जीआईसी
दो बोर्ड से परीक्षा देने के मामले की जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। एक ही वर्ष में दो बोर्ड से परीक्षा देने का मामला गंभीर है। जांच रिपोर्ट मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई की की जाएगी। - दीपक अग्रवाल, परीक्षा नियंत्रक, सीबीएसई
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