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.. तो 15 साल की उम्र में ही मिल गई नौकरी

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बरेली। पिछले दिनों बरेली कॉलेज प्रबंधन ने अस्थाई कर्मचारियों की संविदा बहाल कर पीपीएफ और ईएसआई सुविधा देने की मांग मंजूर कर ली थी। अब इसको लेकर कवायद शुरू हुई तो कर्मचारियों से आठ अगस्त तक सारा रिकॉर्ड मांगा गया है, जिसको देने में कर्मचारी आनाकानी कर रहे हैं। वहीं, कॉलेज ने जब कर्मचारियों का रिकॉर्ड खंगाला तो सामने आया कि पांच कर्मचारियों को 14-15 साल की उम्र में ही नौकरी दे दी गई। इसको लेकर बरेली कॉलेज में हड़कंप मचा हुआ है।
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बरेली कॉलेज में करीब 20 साल पहले अस्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी। पिछले कई साल से इन कर्मचारियों की संविदा खत्म करने और उसे दोबारा बहाल करने का ड्रामा चल रहा है। हर साल कॉलेज संविदा खत्म करता है, फिर कर्मचारी धरना-प्रदर्शन कर हंगामा करते हैं और संविदा बहाल कर दी जाती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। नौ जून को बरेली कॉलेज ने करीब दो दर्जन अस्थाई कर्मचारियों की संविदा समाप्त कर दी। इसके बाद हंगामा शुरू हुआ तो प्रशासन के हस्तक्षेप पर जून के अंतिम सप्ताह में उन्हें बहाल कर दिया। इसके साथ ही बरेली कॉलेज ने कर्मचारियों को पीपीएफ और ईएसआई सुविधा देने का प्रस्ताव भी स्वीकार कर लिया। इस कवायद को पूरा करने के लिए कॉलेज प्रशासन ने कर्मचारियों का रिकॉर्ड तलाशा तो सामने आया कि पांच कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें 14-15 साल की उम्र में ही नौकरी दे दी गई। इसको लेकर कॉलेज में हड़कंप मचा है और खूब चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि कॉलेज ने नाबालिगों से बाल श्रम कराया या कर्मचारियों ने कम उम्र में नौकरी पाकर कॉलेज को धोखा दिया। रिकॉर्ड मांगने पर तनाव में आए कर्मचारी
मामले पर पेंच फंसता देख बरेली कॉलेज प्रशासन ने कर्मचारियों को उनके ही गेम में फंसाने की तैयारी कर ली है। ईपीएफ और ईएसआई सुविधा देने के लिए प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा ने नोटिस जारी कर कर्मचारियों ने उनकी उम्र, पता, आधार कार्ड, फोटो और परिवार समेत तमाम जानकारी आठ अगस्त तक उपलब्ध कराने को कहा है। ऐसे में कम उम्र वाले कर्मचारियों में खलबली मच गई है। जितेंद्र मिश्रा, दयाशंकर, जयवीर समेत तमाम कर्मचारी शनिवार को प्राचार्य से मिलने पहुंचे लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया।
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