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क्लास बंक कर सैरसपाटा.. न भाई न.. पापा तो पता लग जाएगा

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बरेली। शहर के कुछ स्कूलों ने एक नया प्रयोग शुरू करके अभिभावकों का एक बड़ी टेंशन को दूर कर दिया है। अब उन्हें घर बैठे-बैठे यह पता रहेगा कि उनके बच्चे ने किस समय स्कूल में एंट्री ली और किस स्कूल से बाहर निकला। यानी क्लास बंक करके सैरसपाटे पर निकल जाने के आदी बच्चे अब अपने अभिभावकों को गुमराह नहीं कर पाएंगे। स्कूलों ने अभिभावकों को यह सहूलियत देने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस यानी आरएफआईडी की मदद ली है जिसे बच्चों के आईडी कार्ड पर टैग कर दिया जाता है। यह सिस्टम लागू करने से स्कूलों का कुछ खर्च तो बढ़ा है, लेकिन अभिभावकों को उनके बच्चों की शरारतों के लिए जवाबदेही की सिरदर्दी काफी हद तक कम हो गई है।
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शहर के स्कूलों में इस तरह की घटनाएं आम हैं जब बच्चे स्कूल जाने के लिए घर से तो निकले लेकिन स्कूल नहीं पहुंचे। बच्चों की यह हरकत कई बार अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच झड़प और हंगामा होने की वजह भी बनी। यह समस्या बड़ा सिरदर्द बनने लगी तो शहर के स्वदेश भूषण कन्या इंटर कॉलेज, मदर ग्रेस स्कूल, प्रेरणा पब्लिक स्कूल, श्री भारती स्कूल आदि कुछ स्कूलों ने आरएफआईडी टैग के रूप में बच्चों पर नजर रखने का हाईटेक तरीका ढूंढ निकाला। इसके बाद बच्चों के स्कूल के घुसते या स्कूल से बाहर निकलते ही इसका मेसेज पेरेंट्स के मोबाइल पर पहुंच जाता है। यह सिस्टम लागू होने के बाद स्कूल और अभिभावक दोनों तनाव मुक्त हो गए हैं। स्कूलों के मुताबिक हाल ही में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं कि बच्चे घर से निकले और स्कूल नहीं पहुंचे और दोस्तों के साथ कहीं और चले गए। कुछ बच्चों के साथ दुर्घटना हुई या वे देर शाम तक घर नहीं पहुंचे तो उनके पेरेेंट्स ने स्कूलों में हंगामा खड़ा कर दिया। इसी के बाद इस नई तकनीक का सहारा लिया गया।

ऐसे काम करता है आरएफआईडी
बच्चों के आईडी कार्ड में आरएफ आईडी टैग लगाकर उसे स्कूल के अटेंडेंस सिस्टम से जोड़ दिया गया है। स्कूलों के मेन गेट पर यह सिस्टम लगाया गया है। जब बच्चे स्कूल के अंदर दाखिल होते हैं या बाहर निकलते हैं तो सिस्टम पर लगा सेंसर एंटीना आरएफ आईडी से निकलने वाली रेडियो तरंगों को पकड़कर कंप्यूटर पर भेज देता है जिसके बाद कंप्यूटर बच्चे के स्कूल आने या स्कूल से निकलने का मेसेज खुद ब खुद उसके अभिभावक के मोबाइल पर भेज देता है। इस दौरान सिस्टम पर बीप की आवाज भी आती है जो इस बात की पुष्टि कर देती है आईकार्ड से जुड़े मोबाइल पर बच्चे का मूवमेंट भेज दिया गया है।
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खर्च बढ़ा लेकिन अब सुकून
स्कूल प्रबंधन के मुताबिक इस सिस्टम से हर साल एक बच्चे पर तीन सौ रुपये का खर्च बढ़ गया है। यह खर्च स्कूल प्रशासन पेरेंट्स से लेने के बजाय खुद वहन कर रहे हैं। एक स्कूल प्रबंधक सुरेश यादव ने बताया कि शुरुआत में इस बाबत पेरेंट्स से बात की गई तो वे राजी नहीं हुए। ऐसे में स्कूल के बजट से खर्च उठाया जा रहा है ताकि बच्चों की सुरक्षा और स्कूल की प्रतिष्ठा दोनों बरकरार रहे।
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