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अर्पित गंगवार प्रकरण: पांच दिन बाद डीआईओएस ने नामित किया जांच अधिकारी

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बरेली। सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा देने के साथ ‘मम्मी’ के स्कूल से यूपी बोर्ड में भी टॉप कर लेने के मामले की जांच से बच रहे डीआईओएस ने आखिरकर छठें दिन जीआईसी के प्रधानाचार्य को जांच के निर्देश दिए हैं। बताते हैं कि पांच दिनों तक जांच अधिकारी नियुक्त न किए जाने पर विभाग में साहब की अर्पित के पिता से ‘दोस्ती’ की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। ऐसे में फजीहत से बचने के लिए डीआईओएस ने जांच अधिकारी की नियुक्ति कर दी है। साथ ही, तीन दिन में मामले की पूरी जांच कर साक्ष्य समेत रिपोर्ट मांगी है।
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इसी साल यूपी और सीबीएसई दोनों बोर्ड से परीक्षा देकर यूपी बोर्ड में टॉप रैंक हासिल करने में कामयाब रहे नवाबगंज के अर्पित गंगवार का मामला आइने की तरह साफ है। फिर भी ‘साहब’ प्रकरण को और पेचीदा बनाने में लगे हैं। बता दें कि पिछले दिनों शनिवार को यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय सचिव का जांच का आदेश डीआईओएस दफ्तर में पहुंचने के बावजूद पांच दिनों तक किसी को जांच न सौंपे जाने पर ‘साहब’ के रवैए पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि इन दिनों अर्पित के पिता तुलाराम ने कार्यालय में डेरा डाल दिया था। लेकिन मामले में अपनी फजीहत होते देख ‘साहब’ को उच्चाधिकारी के निर्देशानुसार जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया।

यह है मामला
यूपी बोर्ड के एसएसटी इंटर कॉलेज नवाबगंज से इसी साल अर्पित गंगवार ने 91 फीसदी अंकों के साथ हाईस्कूल की परीक्षा पास की। जबकि सीबीएसई से 46 फीसदी अंकों से बेदी इंटरनेशन स्कूल से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। कार्यालय में मामले की सुगबुगाहट शुरू होने के बाद अमर उजाला ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की। जिस पर पांच जुलाई को क्षेत्रीय बोर्ड सचिव ने डीआईओएस को जांच के निर्देश दिए। वाबजूद इसके पांच दिनों तक डीआईओएस ने जांच अधिकारी नियुक्त नहीं किया। जिसने विभागीय मंशा पर सवाल खड़ा कर दिया है।
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