ग्राहकों के इंतजार में दुकानदार।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
होली पर इस बार पकवान बनाना पड़ेगा महंगा
बरेली। होली से ऐन पहले खाद्य तेलों की कीमतों में 80 प्रतिशत तक उछाल ने लोगों को सकते में डाल दिया है। रही-सही कसर मेवों में आई तेजी पूरी कर रही है।
पिछली होली पर सरसों और सोया रिफाइंड तेल का भाव 90 रुपये प्रति किलो से नीचे रहा था। रिफाइंड और पामोलिन ऑयल का रेट भी 75 रुपये प्रति किलो के आसपास था लेकिन इस बार खाद्य तेलों की कीमत दोगुने तक पहुंच गई है। बाजार में इस बार सरसों का तेल और सोया रिफाइंड का रेट 135 से 140 रुपये प्रति किलो तक है। पाम और रिफाइंड भी 130 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। मूंगफली का रेट करीब 30 फीसदी बढ़कर 155 से 160 रुपये हो गया है। सूर्यमुखी तेल के दाम दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 185 से 190 रुपये किलो पहुंच गए हैं।
कारोबारी खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उछाल को वजह बता रहे हैं। कारोबारी दिलीप खंडेलवाल के मुताबिक लगातार बढ़ती कीमतों से औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमत दोगुने तक पहुंच गई है। एक साल में ही सरसों के तेल के दाम 85-90 रुपये किलो से बढ़कर 120 से 125 रुपये किलो और रिफाइंड सोया तेल की कीमत 80-85 से बढ़कर 125 से 130 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
नमकीन-बेकरी उद्योग प्रभावित
खाद्य तेलों की बढ़ती कीमत से नमकीन और बेकरी उद्योग भी प्रभावित हो गया है। उद्यमी केके चंदानी ने बताया नमकीन और बेकरी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल लगातार महंगा हो रहा है। मेवा कारोबारी संजय आनंद ने बताया कि प्रति किलो मखाने पर सौ रुपये से ज्यादा बढ़े हैं। नारियल और दूसरे कई मेवे भी महंगे हुए हैं।
बाजार में पहुंचा रिजेक्टेड तेल
खाद्य तेलों पर भीषण महंगाई से नमकीन, बेकरी और दूसरे उद्योगों में सस्ते तेल की तलाश शुरू हो गई है। सूत्रों ने बताया कि रिजेक्टेड और एक्सपायरी खाद्य तेल भी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। नाम न छापने की गुजारिश के साथ कुछ उद्यमियों ने बताया की निष्प्रयोज्य खाद्य तेल 50 से 70 रुपये किलो तक कीमत में उपलब्ध हो जाता है।