फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: धूल व कार्बन से पनपते हैं दीवारों में सूक्ष्म जीव

Fri, 27 Feb 2026 02:38 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पादप विज्ञान विभाग के शोधार्थियों ने इमारतों के जल्द खराब होने की वजह का पता लगाया है, शोधार्थियों का कहना है कि आसपास की जलवायु का सीधा प्रभाव इमारतों पर पड़ता है। जिस क्षेत्र में इमारत का एक्सपोजर यदि कॉर्बन डाईऑक्साइड व धूल के कारण माइक्रोऑर्गेनिज्म जल्दी इमारतों के बीच पनपने लगते हैं। इससे इमारत जल्द खराब होने लगती है। इस शोध कार्य को हाल ही में एससीआई (साइंस साइटेशन इंडेक्स) के बायोफाउलिंग जर्नल में प्रकाशित होने के लिए चयनित किया गया है।
विज्ञापन

प्लांट साइंस विभाग के शोधार्थियों ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय की अलग-अलग इमारतें स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, इंजीनियरिंग विभाग, पादप विज्ञान विभाग, पांचाल गृह, शोध निदेशालय और विश्वविद्यालय की बाउंड्रीवॉल का बाहरी दीवारों के सैंपल जुटाए। इसमें सामने आया है कि यदि कोई इमारत नई बनी है और उसकी दीवारों पर धूल व कार्बन डाइऑक्साइड के कारण दीवारों के बीच में एल्गाई, फंगाई, ब्रायोफाइट, टेरिडोफाइटा पनपने लगती हैं, इसी कारण दीवारों के बीच में काई, पीपल व अन्य पौधे व झाड़ियां उग आती हैं। सहायक आचार्य डॉ. ललित पांडेय ने बताया कि केवल शहर में ही नहीं अन्य शहरों की भी इमारतों को अध्ययन में शामिल किया है। एक वर्ष में इसमें दिल्ली के लाल किला, राजस्थान में आमेर का किला व बोधगया से भी सैंपल जुटाए। इन इमारतों की बाहर दीवार पर अध्ययन में ये सामने आया कि जो दीवार धूल व कार्बन डाइऑक्साइड के अधिक संपर्क में रहती है वह उसमें सूक्ष्म जीव अधिक पनपे हैं बजाए उनके जो इस तरह के वातावरण से दूर हैं।
डॉ. पांडेय ने बताया कि इस शोधार्थी रिया सिंह, इलमा खान, रिया शर्मा ने करीब एक वर्ष तक इस शोध पर कार्य किया है। इसे एससीआई के बायोफाउलिंग जर्नल में छपने के लिए स्वीकृति भी मिल चुकी है। इसके बाद अब इस तरह से दीवारों के खराब होने से बचाने के लिए पेंट पर कार्य किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें