अमर उजाला ने सोमवार को इस समस्या की खबर ''पाइप लाइन डाली, टोंटियां भी लगाईं, नहीं आया पानी'' शीर्षक से प्रकाशित की है। इसी समस्या पर जल निगम अधिकारी अपने बचाव में तर्क दे रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पटेल विहार योजना में नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत पाइप लाइन डालकर कनेक्शन दिए जाने थे। ठेकेदार की गलती से ग्राम पंचायत की कॉलोनियों में कनेक्शन कर दिए गए। इसीलिए जलापूर्ति शुरू नहीं की गई। हालांकि इसका जवाब किसी के पास नहीं कि शहरी योजना के तहत देहात क्षेत्र में पाइप लाइन कैसे डाल दी गई? बहरहाल, अधिकारियों की गलती का खामियाजा अब आम जनता भुगत रही है।
जलकर नहीं देते इसलिए नहीं देंगे पानी
जल निगम के शहरी क्षेत्र के सहायक अभियंता प्रवीण कुमार के अनुसार करगैना ग्राम पंचायत के बालाजी मंदिर कॉलोनी, चंद्रपुरम कॉलोनी आदि हिस्से में गलती से कनेक्शन हो गए थे। चूंकि वहां के लोग नगर निगम को जलकर नहीं देते, इसलिए वहां जलापूर्ति नहीं हो रही। उनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में पाइप लाइन कैसे डाल दी गई? इसकी जानकारी ग्रामीण क्षेत्र के इंजीनियर ही दे पाएंगे।
जिसने लाइन डाली, जलापूर्ति का जिम्मा उसी का
जल निगम के देहात क्षेत्र के सहायक अभियंता प्रमोद वर्मा का कहना है कि करगैना ग्राम पंचायत में पानी की पाइप लाइन पड़ी है, ऐसा उनके संज्ञान में नहीं है। वहां जिसने पाइप लाइन डाली है, उसने ओवरहैड टैंक से कनेक्शन जोड़े होंगे। योजनानुसार काम हुआ होगा। उसी योजना के अनुसार पानी की आपूर्ति करनी चाहिए।