मल्लपुर के हरीशंकर ने एक एकड़ में सरबती धान लगाया था। शीघ्र पकने वाली प्रजाति के सरबती धान में फूल आ चुका था कि तेज हवा और बारिश से पूरी फसल खेत में बिछ गई। उत्पादन में 20 से 25 फीसदी गिरावट का अनुमान है।
फोटो--
केस- 2
नवाबगंज के विजासिन में रहने वाले देवेश कुमार ने पांच एकड़ से ज्यादा में सरबती धान की फसल लगाई थी। तेज हवा और बारिश से रात में पूरे खेत में फसल बिछ गई। देवेश यह सोचकर परेशान हैं कि खाद, पानी लगाकर पूरी मेहनत करने के बाद भी अब धान कम निकलेगा।
फोटो--
केस- 3
गांव मल्लपुर के झांझन लाल ने 2.5 एकड़ में सरबती धान और लंबे गन्ने की खेती की। दोनों ही फसलें रात आई तेज हवा और बारिश से गिर गईं। खेत में बिछी फसलें देखकर उनका कलेजा मुंह में आ गया। बोले- हमारा तो केसीसी भी नहीं बना है और न बीमा है। कैसे नुकसान सहेंगे।
जाते-जाते मानसून किसानों को बड़ी चोट दे गया है। तीन दिन की बारिश उन किसानों पर भारी पड़ी है, जिन्होंने सरबती धान और गन्ने की अगैती फसल बोयी थी। बारिश के साथ तेज हवा चलने से खेतों में सरबती, बासमती समेत अन्य प्रजातियों का अगैती धान बिछ गया है। गन्ने के उत्पादन में भी 25 से 30 फीसदी की गिरावट का अंदेशा है लेकिन अफसर बेपरवाह बने हुए हैं। बारिश से हुए नुकसान का आकलन कराके किसानों की मदद करने के बजाय अफसर उन्हें न घबराने की सलाह दे रहे हैं। गन्ना तो फसली बीमा में भी शामिल नहीं है। लिहाजा इस नुकसान का क्लेम भी किसानों को नहीं मिलेगा। इंश्योरेंस कंपनी ने बारिश और तेज हवा से हुए नुकसान का न तो सर्वे कराया है और न ही इसकी भरपाई के प्रयास शुरू किए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी इस बार भी सच से दूर रही। पहले ढाई महीनों में उनके 750 मिलीमीटर बारिश होने के अनुमान के विपरीत 480 मिलीमीटर ही बारिश हो पाई। 21 से 24 सितंबर के बीच 80 से 90 मिलीमीटर बारिश हुई। इस बारिश से सदर तहसील के मल्लपुर, तिगरा, आलमपुर जाफराबाद, बड़ा बाईपास के अहलादपुर, मेहतरपुर समेत भोजीपुरा, बहेड़ी, नवाबगंज, आंवला, फरीदपुर, मीरगंज, फतेहगंज पश्चिमी और फतेहगंज पूर्वी क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में सरबती, बासमती धान और गन्ने की अगैती फसल खेतों में बिछ गई है। यहां किसान कुल धान के लगभग 30 फीसदी रकबे में सरबती लगाते हैं, क्योंकि बाजार में सरबती चावल की मांग सबसे अधिक है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. रनजीत सिंह का मानना है कि शीघ्र पकने वाली प्रजातियों का धान गिरने से उनके उत्पादन पर 15 से 20 फीसदी तक असर पड़ सकता है।
नुकसान की भरपाई का यह है नियम
फसल सुरक्षा बीमा के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों की फसल का बीमा किया जाता है। अगर फसल को किसी आपदा से नुकसान होता है तो क्लेम पाने के लिए उसका 48 घंटे में सर्वे होना जरूरी है। सर्वे रिपोर्ट पर ही किसान को बीमा का क्लेम मिलता है।
फोटो- अनिल साहनी
कृषि विभाग ने नहीं कराया आकलन
प्रगतिशील किसान अनिल साहनी का कहना है कि कृषि विभाग ने मानसून बारिश से धान, गन्ना, तिलहन, दलहन, पेठा की फसल में हुए नुकसान का आकलन शुरू नहीं कराया है। किसानों ने सूचना देने के लिए अफसरों को फोन किए लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। जागरूक किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और जिलाधिकारी को ट्वीटर पर जानकारी दी है।
आज दोपहर बाद नहीं होगी बारिश
पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा ने बताया कि दिवाली तक बारिश होने की बात ठीक नहीं है। 24 सितंबर को दोपहर तक ही बारिश होगी। इसके बाद आसमान में भले ही बादल दिखें लेकिन बारिश नहीं होगी। गन्ने की शीघ्र पकने वाली प्रजातियों को नुकसान जलभराव से होगा। किसान खेत में पानी न रुकने दें।
बीमा कंपनी से संपर्क करें
किसान अपने खेत में फसल के नुकसान का सर्वे कराने या अन्य जानकारी के लिए बजाज आलियांज कंपनी के फोन नंबर 9654039179 और 8808099300 पर संपर्क कर सकते हैं। अगर बीमा कंपनी रिस्पांस न दे तो कृषि विभाग के अधिकारियों से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
क्या कहते हैं किसान
फोटो--
हमने दो एकड़ में धान लगाया है। बारिश और तेज हवा से यह खेत में ही बिछ गया। गन्ने की भी यही हालत है। हमने फोन पर भी संपर्क करने की कोशिश की लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। - मूलचंद, किसान, तिगरा मल्लपुर
फोटो-
हम पर केवल एक एकड़ जमीन है। उसमें धान लगा था। तेज हवा और बरसात से वह गिर गया। अब इसमें काफी कम धान निकलेगा। अब दूसरों के खेत में मजदूरी करनी पड़ेगी। - अंबा सहाय, किसान, बड़ा बाईपास
कोट-
गन्ने की फसल इंश्योरेंस से बाहर है। सरबती या अन्य शीघ्र पकने वाला धान गिरने से नुकसान हुआ है। इसका सर्वे बजाज आलियांज इंश्योरेंस कराएगी। कृषि विभाग उस पर नजर रखेगी। डॉ. रामतेज यादव, जिला कृषि अधिकारी