बरेेली। फिलहाल जिले में तेजी से फैल रहे कोरोना से सितंबर में राहत मिल सकती है बशर्ते इस बीच लोग सावधानी बरतें। पिछले चार दिनों से कोरोना संक्रमण के मामलों में स्थिरता आने के बाद विशेषज्ञों ने यह उम्मीद जताई है। कोरोना संक्रमण की शुरुआत से वायरस पर नजर रखने वाले शहर के प्रमुख चिकित्सकों के मुताबिक हफ्ते भर तक और यही स्थिति रही तो अगस्त के आखिर तक संक्रमण का फैलाव सिमटने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस का फैलाव होने पर वह तब तक काबू नहीं होता जब तक उसकी वैक्सीन या कोई दवा ईजाद न हो जाए। अगर वैक्सीन या दवा नहीं बन सकी है तो हर्ड इम्युनिटी बनने के बाद ही संक्रमण का फैलाव कम होने के आसार रहते हैं मगर यह स्थिति काफी भयावह हो सकती है। क्योंकि हर्ड इम्युनिटी तकरीबन 50 से 60 फीसदी लोगों के संक्रमित होने के बाद ही बनने की उम्मीद रहती है। यानी लाखों की तादाद में लोगों का संक्रमित होना तय होता है। हालांकि, हर्ड इम्युनिटी माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर कैटगरी में होती है। ऐसे में अगर कोई शुगर, ब्लडप्रेशर, हाइपर टेंशन या हार्ट समेत अन्य किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है तो संक्रमण सीवियर स्टेज में होने से जानलेवा हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक जिले में बीते चार दिनों से 175 से दो सौ के बीच में संक्रमित मिल रहे हैं। हफ्ते भर यही स्थिति अगर रही तो ये कोरोना का उच्चतम स्तर माना जाएगा और अगस्त के आखिर या सितंबर की शुरुआत में संक्रमित कम होने के आसार हैं।
कोरोना के चरम स्तर का निर्धारण करना आसान नहीं
माइक्रो बॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल कुमार गोयल के मुताबिक, वायरस के फैलाव के दौरान यह तय करना बेहद मुश्किल होता है कि आखिर कब संक्रमण का फैलाव अपनी चरम स्थित यानी पीक पर है। अनुमान के तौर पर माना जाता है कि एक निर्धारित सैंपलिंग में करीब दस दिन या दो हफ्ते तक एक निर्धारित क्रम में संक्रमित मिलने लगें तो इसे चरम कहा जाता है। उन्होंने बताया कि बरेली में बीते चार दिन से पौने दो सौ से दो सौ के बीच में ही संक्रमित मिल रहे हैं। कम से कम अगर अगले सात दिन और अधिकतम दस दिन तक भी यही स्थिति रहती है तो इसे चरम स्थिति माना जा सकता है।
संभल जाएं अन्यथा बहुत कुछ खो पड़ेगा
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष रहे डॉ. सत्येंद्र सिंह का कहना है कि बीते चार दिनों की स्थिति कोरोना के चरम पर आने की संकेत दे रही है। यह स्थिति कुछ दिन और रहे तो पीक आने की आशंका है। मगर यह स्थिति भविष्य को लेकर अच्छे संकेत नहीं दे रही है। क्योंकि वायरस जब चरम पर पहुंचेगा तो करीब अगले 20 से 25 दिन तक हालात बेकाबू रहेंगे। जिसमें बहुत कुछ खोना पड़ सकता है। लोगों से अपील है कि वह संभल जाएं। ताकि धन जन हानि न हो। पीक पर कोरोना के आने से अगले माह भर बाद राहत की उम्मीद लगाना ठीक नहीं है। बहुत कुछ खोने की आशंका भी है।
संक्रमण के साथ वायरल बीमारियां घातक
इंडियन डेंटल एसोसिएशन बरेली के पदाधिकारी डॉ. अनूप आर्या का कहना है कि बारिश का मौसम होने से वायरल बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। कोरोना के जैसे लक्षण वायरल बीमारियों समेत टाइफाइड, मलेरिया के भी होते हैं। लिहाजा, किसी में मलेरिया या टाइफाइड या सांस संबंधी रोगों की पुष्टि हुई है तो वह कोरोना की जांच भी जरूर करा लें। ताकि संक्रमण का जल्दी पता चल जाए। उन्होंने आशंका जताई कि इन बीमारियों के साथ ही अगर कोरोना संक्रमण भी है तो स्थिति घातक हो सकती है। समय से संक्रमण का पता चलने पर बचाव की उम्मीद है।
संक्रमण का दायरा अभी बढ़ेगा, प्लाजमा थेरेपी ही एक विकल्प
आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल के मुताबिक लोगों ने संक्रमण से बचाव के सारे नियम ताक पर रख दिए हैं। बाजार, मंडी और फुटकर दुकानों पर जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में अगर इस भीड़ में कोई संक्रमित होगा तो एक व्यक्ति तमाम लोगों को संक्रमित कर देगा। जो अन्य के संपर्क में भी आएंगे। ऐसे में संक्रमण का दायरा अगले माह से कम होगा.. इसका कोई ठोस आधार नहीं है। कोरोना की वैक्सीन नहीं है सिर्फ प्लाज्मा थेरेपी ही इसका एक विकल्प है। लोगों से अनुरोध है कि वह जागरूक हों और संक्रमण से बचाव का प्रयास करें।
दस दिन बाद और बढ़ सकते हैं संक्रमित
बरेली आर्थोपेडिक एसोसिएशन के सचिव डॉ. आरके सिंह का कहना है कि खरीदारी, आवाजाही या अन्य किसी तरह संक्रमित के संपर्क में अगर कोई आया होगा तो फिलहाल वायरस इक्यूबेशन पीरियड में ही होगा। संबंधित व्यक्ति में करीब लक्षण दिखने में करीब आठ से दिन का समय लग सकता है। ऐसे में अगले दस दिनों में तादाद कम होने के बजाय बढ़ने के आसार ज्यादा हैं। संभवत: डेढ़ से दो माह बाद संक्रमण के फैलाव में कुछ कमी दिखे वह भी जब लोगों में हर्ड इम्युनिटी बनेगी। जितने जल्दी संक्रमितों को ट्रेस किया जाएगा। फैैलाव उतना कम होगा।