विदेश में बैठे हैं साइबर ठग
विवेचना में पता लगा है कि ठगों के आईपी एड्रेस दुबई, फिलीपींस, वियतनाम व कंबोडिया के हैं। भारतीयों को फंसाने के लिए यहीं के खाते इस्तेमाल किए जाते हैं। कई बार एक ही चैनल के जरिये ठगी के शिकार लोगों की रकम ऐसे ही किसी दूसरे पीड़ित के खाते में डलवाकर निकाल ली जाती है। मतलब, पुलिस जब दूसरे प्रदेश में किसी शख्स को आरोपी मानकर उसके पास पहुंचती है तो पता लगता है कि वह भी इसी तरह ठगा जा चुका है। इस तरह कई मामलों में ठगी के पीड़ित ही दूसरे मामले में आरोपी बन जाते हैं।
जालसाजों ने खुलवाए लोगों के खाते
टेलीग्राम से ठगी के मामलों में खाताधारकों की तलाश में साइबर थाने की टीम इन दिनों पंजाब व हरियाणा में भटक रही है। वहां कुछ खातों में रकम भेजी गई थी। टीम खाताधारकों तक पहुंची तो पता लगा कि उनसे आधार कार्ड और फोटो आदि लेकर खाते खुलवाए गए थे। खातों की पासबुक, चेकबुक व डेबिट कार्ड भी आरोपियों ने कब्जे में ले रखा है। खाताधारकों को दस या बीस हजार रुपये उसी वक्त दे दिए गए। पुलिस ने खाता खुलवाने वालों के बारे में पूछा तो खाताधारक उनका सही नाम-पता नहीं बता सके। उनका जो मोबाइल नंबर दिया, वह भी बंद जा रहा है।
बरेली रेंज डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि टेलीग्राम एप समेत सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर लुभावने ऑफर, सरकारी योजनाएं, नौकरी और पार्ट टाइम जॉब का झांसा देकर ठगी का चलन बढ़ा है। साइबर टीम ने कुछ लोगों की ठगी हुई रकम वापस भी कराई है। इसके बाद भी सावधानी ही बेहतर विकल्प है। लोगों को किसी झांसे में नहीं आना चाहिए।