बरेली। कांवड़ यात्रा में पहने जाने वाली ड्रेस अब गांव गांव तक पहुंच गयी है। बाजार में फैंसी आइटमों की भरमार है। हर किसी के बजट के अनुरूप वैराइटी उपलब्ध होने से ग्राहकों की लगातार तादाद बढ़ती जा रही है। इस वर्ष दस करोड़ से ज्यादा कारोबार होने की उम्मीद है।
सावन माह में अब ओरेंज कलर में कांवड़ियों की ड्रेस अब कुछ ज्यादा ही दिखने लगी हैं। यात्रा में शामिल होने वाली महिलाएं भी इसी कलर में धोती पहन रही हैं। युवा वर्ग में ड्रेस के प्रति क्रेज ज्यादा है, वैसे हर आयु वर्ग के यात्री इसे पहन रहे हैं। पिछले पांच वर्षो से कांवड़ ड्रेस की मांग ज्यादा बढ़ी है। सिर्फ एक माह चलने वाला सीजनल कारोबार दस वर्ष पहले हजारों रुपये में था जो बढ़कर अब करोड़ों तक पहुंच गया हैॅ। सावन में अभी तक जिले भर में सात करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार हो चुका हैं। व्यापारी कहते हैँ कि अभी एक सोमवार बाकी है। इसलिए दस करोड़ रुपये का आंकड़ा पार हो जाएगा।
निर्माण दक्षिण में, छपाई लुधियाना
दक्षिण भारत में कांवड़ यात्रा के लिए विशेष रुप से ड्रेस तैयार होती है। लुधियाना में शर्ट पर शंकर जी और अन्य तस्वीरें छापी जाती हैं। इसके बाद पूरी यूपी, उत्तरांचल, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान आदि राज्यों के सप्लाई होती है। बरेली और आसपास जिलों में कानपुर, सहारनपुर, दिल्ली आदि थोक बाजारों से माल आता है।
गुजराती झंडा ऊंचा
सावन आदि त्योहारों पर फहराया जाने वाला ओरेंज कलर झंडा गुजरात स्थित सूरत जिले में बनता है। पताका और झंडा पर छपाई कर मांग अनुसार जिलों में सप्लाई होती है।
थोक में बिक्री
कुतुबखाना, शास्त्री बाजार आदि स्थानों पर थोक सप्लायर हैं। रिटेलर कहते हैं कि सावन में ड्रेस आदि की मांग ज्यादा है। बाजार में एक दो ड्रेस आदि कम बिक रहीं हैं। लोग पूरे जत्थे के लिए ड्रेस और अन्य सामान खरीद रहे हैं। गांवों में ज्यादा क्रेज हो गया है। ग्राम सभा चुनाव होने वाले हैं, संभावित प्रत्याशी अपने समर्थक ग्रुप के लिए चार - पांच सौ ड्रेस एक साथ खरीद रहे हैं। शहरी यात्री इतनी बड़ी तादाद खरीददारी नहीं कर रहे हैं। सुनील अरोरा राजू बताते हैं कि पिछले पांच सालों से फैंसी कांवड़ ड्रेस मांग ज्यादा बढ़ी हैं। अरोरा बताते हैं कि महीने भर चलने वाला कारोबार भी भक्तिमय हो गया है।