बरेली। स्कूल, कॉलेज में छात्र-छात्राओं को अगर कोई परेशानी है। कोई उन्हें तंग कर रहा है या अन्य किसी मुसीबत में फंस गए हैं। पहचान सार्वजनिक होने या लोकलाज का डर है तो घबराएं नहीं। नजदीकी थाना, 112 या अन्य हेल्पलाइन पर कॉल करके पुलिस को जानकारी दें। पुलिस आपकी पहचान गोपनीय रखते हुए आपकी समस्या का समाधान कराएगी।
विद्यार्थियों से ये बातें एसपी ट्रैफिक शिवराज ने सोमवार को जनता इंग्लिश इंटर कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में कहीं। उन्होंने कहा कि कई बार अराजकतत्व या गलत व्यक्ति बच्चों को शिकार बनाते हैं। छात्राएं नाम उजागर होने के डर से खामोश रहती हैं, जो कि नहीं करना चाहिए। कॉलेज स्तर पर कोई दिक्कत होगी तो उसका भी बिना किसी को पता लगे समाधान कराया जाएगा।इस मौके पर विद्यालय के प्रबंधक निदेशक काशिफ रजा, प्रधानाचार्य जैनब, दीपशिखा सिंह, शिवम कुमार, जितेंद्र कश्यप समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
फोन में तस्वीर लेते समय बरतें सावधानी, अनजान एप पर न दें एक्सेस
साइबर क्राइम पर शोध कर रहे एसपी ट्रैफिक ने सोशल मीडिया के खतरों के बारे में बताया कि फोन पर तस्वीरें लेते समय बहुत ज्यादा सचेत रहें। क्योंकि यह अपनी निजता को खुद भंग करने जैसा है। आपके अपने ही फोन में ली गई तस्वीर एक साथ कई जगह जाती है। कैलिफोर्निया स्थित गूगल हेडक्वार्टर से लेकर मोबाइल बनाने वाली कंपनी के हेडक्वार्टर के जरिए विदेशों तक पहुंच जाती है। इसी तरह आपके फोन में लॉगिन एप्लीकेशन के हेडक्वार्टर के पास भी आपकी लाखों तस्वीरें और महत्वपूर्ण जानकारियां पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि चीन के जरिए विभिन्न देशों में बैठे साइबर अपराधी मोबाइल हेडक्वार्टर से आपकी ही जानकारी चुराकर डीप फेक और अन्य साइबर अपराधों में इस्तेमाल करते हैं।
घायल को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाएं
एसपी ट्रैफिक ने कहा कि दुर्घटना के बाद एक घंटे तक का समय घायल के लिए बहुत कीमती होता है। इस अवधि में अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाई जा सकती है। इसे यातायात मानकों में गोल्डन आवर कहते हैं। घायल की मदद करने वाले को प्रशासन पुरस्कृत भी करता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से वाहन चलाते समय हेलमेट या सीट बेल्ट लगाने और घर में भी सबको प्रेरित करने के लिए कहा।
छात्र-छात्राओं को मिले सवालों के जवाब
सवाल- सोशल मीडिया पर हमारी निजी जानकारी लीक होने पर अगर धमकी मिलने लगे तो क्या करना चाहिए?
- फरहान
जवाब- सोशल मीडिया पर साझा की गई कोई भी जानकारी सुरक्षित नहीं है, लिहाजा बहुत सीमित चीजें ही साझा करें। फिर भी अगर साइबर अपराध होता है और कोई आपको धमकी देता है तो 1930 पर कॉल करके तत्काल पुलिस को जानकारी देनी चाहिए।
सवाल- लोन एप्स के जरिए मिलने वाली मदद कितनी सुरक्षित है?
- साहिल उस्मान
जवाब- बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। इस तरह की चाइनीज एप के जरिए साइबर अपराधी लोगों के निजी डाटा तक घुसपैठ करते हैं और इसका दुरुपयोग करके साइबर अपराध को अंजाम देते हैं। इन एप्स पर कभी फोटो, वीडियो या ऑडियो के एक्सेस की अनुमति न दें।
सवाल- डीप फेक क्या है?
- दिव्या
जवाब- सोशल मीडिया से आपकी जानकारी चुराकर उसके जरिए जाली फोटो, वीडियो या अन्य कंटेट तैयार करना डीप फेक है।
सवाल- बिना हमारी जानकारी के अगर कोई हमारी तस्वीर लेता है तो हम क्या कर सकते हैं?
- महविश
जवाब- 18 साल की उम्र तक आपकी तस्वीर लेने से पहले आपके माता-पिता या शिक्षकों की अनुमति होनी चाहिए। इसके बाद भी अगर कोई आपकी तस्वीर ले रहा है तो यह एक अपराध है। आपको पुलिस की मदद लेनी चाहिए।