बरेली। मॉडल टाउन के श्रीहरि मंदिर में चल रही पांच दिवसीय श्रीराम कथा का सोमवार को विश्राम हुआ। आयोजन के अंतिम दिन कथावाचक प्रेमभूषण महाराज ने दान का महत्व बताया। कहा कि कलयुग में दान करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
प्रवचन में उन्होंने बताया कि जब मनुष्य दुनिया से विदा होता है तो उसके साथ केवल पुण्य कर्म ही जाते हैं। बाबा तुलसी कहते हैं कि कलयुग जैसा कोई अन्य युग इसलिए नहीं है, क्योंकि इस युग में मात्र भगवान के नाम का जाप करने से ही मनुष्य का उद्धार हो जाता है। महर्षि वाल्मीकि की यह शिक्षा हमेशा याद रखने की आवश्यकता है कि भगवत प्रसाद का रस अपने आप प्राप्त नहीं होता है। इसके लिए प्रयास करना पड़ता है।
ये संसार मनुष्य के लिए कई प्रकार की बाधाओं से भरा हुआ है। हर किसी के पास अपनी व्यथा की अलग कथा है, जिसे सुनकर मन विचलित हो जाता है लेकिन जब हम भगवान की कथा सुनते हैं, तो मन आनंद और नए उत्साह से भर जाता है। जीवन में जितना अधिक सदाचार होगा, उसकी परमात्मा के चरणों में उतनी ही प्रीति होगी।
संसार में कुछ भी अनिश्चित नहीं है सब कुछ निश्चित है। भगवान की अपनी व्यवस्था है और वह संसार की भलाई के लिए है। मनुष्य आता है और जाता है। इस दौरान मुख्य यजमान अरुण गुप्ता, रामदयाल मोहता, दिनेश सोलंंकी, डॉ. सत्यपाल गंगवार, विवेक, रेनू छाबड़ा, कंचन अरोड़ा, नीलम साहनी, अखिलेश सिंह और गुलशन आनंद मौजूद रहे।
सात्विक आहार लें
उन्होंने कहा कि अगर आप अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं तो अपनी निद्रा पर काबू करें। भोजन के मामले में आनाकानी ना करें, जो सात्विक आहार मिले वह खाएं। अपने साथ किसी प्रकार की मजबूरी लाद कर न चलें। कोई कार्य अपूर्ण होने पर घबराएं नहीं। संवाद