बरेली। कोरोना वायरस के संक्रमण से शहरवासियों को बचाने के लिए चल रही जंग में चिकित्सकों के पास उपकरण ही नहीं नहीं है, जिसके चलते अब उन्हें भी कोरोना संक्रमण होने की आशंका का डर सता रहा है। आइएमए के पदाधिकारियों ने प्रशासन के जरिए शासन को पत्र भेजकर पर्सनल प्रोटेक्शन किट मुहैया कराने की मांग की है।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया कि संक्रमण से चल रही जंग में फिलहाल निजी अस्पताल के तमाम डॉक्टर्स पीपीई किट न होने से निहत्थे हैं। संबंधित मामले पर तीन दिन पहले कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी आइएमए ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। शासन को अधिकारियों के जरिए पत्र भेजकर किट मुहैया कराने के लिए कहा गया था। इसके अलावा जिला अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टर्स और एंबुलेंस चालकों ने भी किट मुहैया कराने के लिए सीएमओ से मांग की थी। साथ ही, बार-बार मांग के बाजवूद किट न मिलने पर जमकर हंगामा भी हुआ था, लेकिन अब तक किट नहीं मिलीं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब डॉक्टर्स ही असुरक्षित हैं तो आम जनता का कैसे बेहतर इलाज हो सकेगा। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवीश अग्रवाल का कहना है कि किट न होने से अन्य मरीजों और डॉक्टरों के भी संक्रमित होने का खतरा है। डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक इस वक्त फिजीशियन के पास सर्वाधिक लोग पहुंच रहे हैं। इनमें अगर एक भी कोरोना पॉजिटिव हुआ तो इससे अन्य मरीजों के साथ डॉक्टर को भी खतरा है। ऐसे में पर्सनल प्रोटेक्शन किट जरूरी है।
हेल्थकेयर प्रोफेशनल को मिले पीपीई किट
आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. विनोद पागरानी का कहना है कि पीपीई किट की उपलब्धता बाजार में बेहद कम है। भारत सरकार से अनुरोध है कि जल्द से जल्द इस किट को डीपीसीओ रेट पर उपलब्ध कराई जाए ताकि इलाज कर रहे डॉक्टर्स का मनोबल बढ़ सके। कहा कि अगर कोरोना से जंग लड़नी है तो सरकार को हथियार यानी पीपीई किट मुहैया करानी होगी।
पर्सनल प्रोटेक्शन किट में यह होते है सामान
पीपीई में ग्लब्स, कैप, गॉगल, मास्क एन-95, थ्री लेयर गाउन, शूज और शूज कवर आदि होते हैं। एक किट की कीमत करीब दो से तीन हजार तक होती है। एक किट को पहनने में भी 20-35 मिनट का समय लगता है। डॉक्टरों के मुताबिक एक बार भी अगर टॉयलेट जाना पड़ा तो वह किट दोबारा नहीं पहनी जा सकती है। ऐसे में अगर एक किट खरीद भी ली जाए तो वह एक बार में ही खराब हो जाएगी।
‘कोरोना संदिग्ध के सैंपल भरने और उसके इलाज के दौरान वार्ड में मौजूद रहने वाले के लिए किट की उपलब्धता है। सभी निजी अस्पतालों को किट दी जा सके, इसके लिए आईएमए के पदाधिकारी अपने संगठन के पदाधिकारियों के जरिए शासन से किट मुहैया कराने की मांग करें। किट प्राप्त होगी तो उन्हें उपलब्ध करा दी जाएगी।’ - डॉ. वीके शुक्ल, सीएमओ