प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को देश के जिलाधिकारियों से कोरोना संक्रमण की स्थिति पर सीधी बातचीत की। इस दौरान बरेली के डीएम नितीश कुमार को उनसे करीब छह मिनट रूबरू होने का मौका मिला। प्रधानमंत्री ने उनसे गांवों का हाल पूछा तो उन्होंने बताया कि निगरानी समितियों की तत्परता से जिले के 68 फीसदी गांवों में कोरोना का एक भी केस नहीं मिला। संक्रमण दर भी तेजी से कम हुई है। मृत्यु दर भी दूसरे जिलों से कम है।
प्रधानमंत्री ने दस राज्यों के 54 जिलाधिकारियों से वर्चुअल बैठक की। इनमें यूपी के पांच डीएम थे लेकिन प्रधानमंत्री से बातचीत सिर्फ बरेली के डीएम की हुई। प्रधानमंत्री ने बरेली के डीएम से संक्रमण की स्थिति और उसे रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों के बारे में पूछा। डीएम ने बताया कि अप्रैल में संक्रमण बढ़ते ही सैंपलिंग में तेजी के साथ मरीजों के आइसोलेशन और उनके संपर्क में आने वालों को क्वारंटीन कराकर उनकी जांच कराई गई। नगर और ग्राम निगरानी समितियों को भी सक्रिय कर दिया गया।
इस बीच 23 अप्रैल को सर्वाधिक केस मिले, लेकिन इसके बाद संक्रमण दर कम हो रही है और अब सिर्फ 2.4 फीसदी रह गई है। पीएम ने डीएम से गांवों की हालत के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि निगरानी समितियों की सक्रियता की वजह से जिले के 68 फीसदी ग्राम पंचायतों में कोरोना का एक भी केस नहीं मिला। जिन गांवों में केस मिले वहां कैंप
लगाकर संदिग्ध संक्रमितों की एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच कराई गईं। लोगों को मेडिसिन किट भी दी गई। जो गंभीर मरीज थे उन्हें फौरन इलाज मिला।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर निजी अस्पतालों को भी संदिग्ध मरीजों के इलाज की मंजूरी दी गई। इससे दूसरे जिलों की तुलना में बरेली में मृत्यु दर कम रही। डीएम ने ऑक्सीजन की उपलब्धता के बारे में प्रधानमंत्री को बताया कि शहर में दो निजी अस्पताल और दो मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन प्लांट लगा है। इफको आंवला और कोविड अस्पताल में भी ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा रहा है। सीएचसी-पीएचसी पर महिलाओं और बच्चों के लिए कोविड वार्ड बन रहे हैं। वैक्सीनेशन का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। सभी सीएचसी पर भी सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन सिस्टम लगाए जा रहे हैं।