बरेली। मंडी समिति में राजस्व चोरी के प्रमाण मिलने पर प्रशासन ने शनिवार सुबह छापा मारा। इस दौरान कई गड़बड़ियां मिलीं। इस पर शुल्क वसूली में लगे मंडी के स्टाफ को हटाकर तहसील कर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
कृषि मंडी उत्पादन परिषद के अफसर लंबे समय से आढ़तियों से मिलीभगत कर राजस्व चोरी करा रहे हैं। खुद को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताने वाले मंडी सचिव का दबदबा ज्यादा होने से कोई बोल ही नहीं पाता है। इस संबंध में तमाम शिकायतें सिटी मजिस्ट्रेट से हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब डीएम के हाथ सबूत लगे तो शनिवार सुबह छह बजे टीम के साथ छापा मारने पहुंच गए। वह एडीएम (प्रशासन) अरुण कुमार, तहसीलदार (सदर) खालिद अंजुम खां, सिटी मजिस्ट्रेट उमेश मंगला आदि के साथ जब मंडी गेट पर पहुंचे तो अफरा-तफरी मच गई।
डीएम गौरव दयाल ने गेट कीपर से रिकॉर्ड जब्त कराया। आढ़ती मौला बख्श, विशाल, नजाकत, इमरान, सिद्दीकी, मौसमी आदि के पास सिक्स और नाइन आर रिकॉर्ड सही नहीं मिला। गेट पर एक भी वाहन की एंट्री दर्ज नहीं थी, जबकि परिसर में सब्जी और फल से लदे तमाम वाहन मौजूद थे। नीलामी हो रही थी, लेकिन मंडी शुल्क कागजों पर जमा हो रहा था। बता दें कि ‘अमर उजाला’ कई बार मंडी परिसर में कैंटीन, सफाई ठेका, राजस्व चोरी, अवैध आढ़ती, फड़ आदि मामलों में अनियमितता से संबंधित खबरें प्रकाशित कर चुका है।
मच गई अफरा-तफरी
मंडी कर्मियों और आढ़तियों को एहसास ही नहीं था कि छापा पड़ सकता है, इसीलिए जब डीएम टीम लेकर पहुंचे तो अफरा-तफरी मच गई। एजेंटों ने सचिव को फोन किया, लेकिन उठा ही नहीं।
50 से ज्यादा वाहनों की एंट्री हुई
डीएम ने मंडी समिति परिसर में फैली अराजकता और राजस्व वसूली में खेल को देखते हुए मंडी सचिव कार्यालय मेें तैनात स्टाफ हटवा दिया। इसके स्थान पर तहसील के लेखपाल, कानूनगो और संग्रह अमीन लगा दिए गए हैं। शनिवार शाम छह बजे तक 50 से ज्यादा वाहनों की एंट्री हुई, जबकि अन्य दिनों में दस वाहन भी बमुश्किल दर्ज होते हैं। बताया जा रहा है कि मंडी सचिव ने आढ़तियों से कहा है कि वे दो दिन तक काम हल्का रखें ताकि जांच में मामला सही हो जाए।
खूब हो रही राजस्व चोरी
थोक मंडी समिति डेलापीर परिसर में हर दिन औसतन 40 लाख रुपये का कारोबार होता है। इस तरह एक माह में एक से सवा करोड़ रुपये राजस्व आना चाहिए, लेकिन कागजों में करीब दस लाख रुपये ही वसूली दिखाई जा रही है।
सख्त कार्रवाई के संकेत
छापामारी में मिली गड़बड़ियों से डीएम काफी नाराज हैं। बताया जा रहा है कि मंडी सचिव और अन्य कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। डीएम ने गोपनीय रिपोर्ट बनाई है।
‘मंडी शुल्क वसूली में हेराफेरी आदि की दर्जनों शिकायतें मिली हैं। भारी राजस्व चोरी के मामले मिलने पर छापा मारा गया। कई ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे पता चला है कि काफी समय से गड़बड़ी चल रही है। सख्त कार्रवाई होगी।’
- अरुण कुमार, एडीएम, प्रशासन