धनतेरस और दिवाली के लिए बाजार सज चुके हैं। शहर के मुख्य बाजारों में दुकानदारों से लेकर ठेला, फड़, ऑटो, ई-रिक्शा और रिक्शे वालों ने तीन चौथाई सड़क घेर रखी हैं। नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, प्रशासन और सिविल पुलिस पर व्यवस्था ठीक करने की जिम्मेदारी है, मगर सिस्टम आम नागरिकों की समस्याओं से लापरवाह है। आप, दिवाली या धनतेरस पर खरीदारी के लिए कार, स्कूटी, बाइक या दोपहिया वाहन से बाजार जाना चाहते हैं, तो जाम आपको दुकान तक नहीं पहुंचने देगा। मुख्य बाजारों में अतिक्रमण और जाम से पैदल निकलना तक मुश्किल है। पेश है त्योहार पर सजे बाजारों के हाल पर अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट।
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शहामतगंज मार्केट
समय दोपहर 12.30 से एक बजे
फल मंडी में दोनों ओर दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ है। बीच रास्ते में लाइन से स्कूटर और बाइक का अघोषित स्टैंड बना है। पुलिया से लेकर शहदाना रोड पार करते हुए साहू रामस्वरूप डिग्री कॉलेज तक सड़क के दोनों ओर दुकानदार दो से तीन फुट तक सामान आगे बढ़ाकर लगाए हैं। बीच में रिक्शे, ठेले वालों ने सड़क कब्जा रखी है। ग्राहकों का दुकानों तक पैदल पहुंचना मुश्किल है।
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सिविल लाइंस
समय: शाम 4.0 से 4.30 बजे
अयूब खां चौराहे से हनुमान मंदिर, नावल्टी चौराहा, कुमार टाकीज तक सड़क के दोनों ओर शोरूम और दुकानों के बाहर चाट, पकौड़ी, डोसा के ठेले लगे हैं। अस्पताल गेट के सामने रेडीमेड कपड़े, जूता चप्पल, खिलौने के फड़ और ठेले लगने से रास्ता जाम है। लोगों को पैदलन निकलने में भी दिक्कत हो रही है।
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पुराना रोडवेज बस अड्डा
समय: शाम 4.30 से 5.0 बजे
बड़े होटलों का सामान, सब्जी, पूड़ी के ठेले, सीडी कैसेट, जूस, किराना के खोखे दो से तीन फुट तक सड़क दबाए हैं। बिजली दुकानों के ग्राहकों के वाहन सड़क पर खड़े हैं। मैकेनिक इनायत खां बोले, हम तो सौ रुपये रोजाना किराया देते हैं, तब सड़क मिलती है।
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कुतुबखाना
समय: शाम 5.30 बजे
ऑटो, ई-रिक्शा, टेंपो, फल, सब्जी के ठेले, रेडीमेड कपड़ों के फड़ सड़क के बीचोंबीच तक सजे हैं। हर दुकान के आगे चार-छह बाइक खड़ी हैं। खोवा वाली गली से लेकर चूड़ी वाली गली में भी आसानी से पैदल नहीं जा सकते हैं।
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बड़ा बाजार
समय: शाम 5.30 से 6.0 बजे
दिवाली के लिए कपड़े, मूर्तियां, कलेंडर, किताबें, लहंगे से लेकर हर छोटी बड़ा सामान सजा है। मगर, खरीददारी करना बेहद मुश्किल है, क्योंकि हर दुकानदार ने अपनी दुकान दो से तीन फुट तक आगे बढ़ा ली है। बाकी कमी रिक्शा, ठेला, ई-रिक्शा और टेंपो वालों ने पूरी कर दी है।
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सराफा बाजार
समय: शाम 6.0 से 6.30 बजे
दुकानों के आगे पायदान बनाकर दो फुट तक सड़क घेर रखी है। बाइक या कार खड़ी होने से रात 10 बजे तक रोजाना ही यहां भारी जाम रहता है। त्योहारों पर बर्तन और गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों की दुकानें सड़क तक लगी हैं। यहां बाजार के समय में निकलना तो किसी जंग को जीतने से कम नहीं है।
क्या कहते हैं दुकानदार
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अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी पुलिस की है लेकिन जब चौकी और थानों के बाहर ही अतिक्रमण है तो बाजारों को कौन व्यवस्थित करेगा। दुकानदार, ऑटो, टेंपो, ई-रिक्शा सबने बुरा हाल कर रखा है। कहीं कोई सख्ती नहीं। नियम कानून की धज्जियां उड़ रही हैं।
- दुर्गेश खटवानी, मेडिकल व्यवसायी
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कोतवाली और कोहाड़ापीर से टेंपो और ई-रिक्शा के कुतुबखाना आने पर रोक लगा दी जाए तो जाम की आधी समस्या दूर हो जाएगी। ठेले और फड़ वाले भी कम जिम्मेदार नहीं है। सबसे ज्यादा जिम्मेदार तो पुलिस है जो कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं।
- संजय आनंद, व्यापारी, कुतुबखाना
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पुलिस प्रशासन की सख्ती के बिना न तो अतिक्रमण हटेगा, न ही जाम कम होगा। व्यापारी से लेकर आटो टेंपो वाले खुद अतिक्रमण कर रहे हैं। खुद तो अपनी जिम्मेदारी तभी समझेंगे, जब प्रशासन की सख्ती होगी। इकबाल सिंह बाले, व्यापारी, बड़ा बाजार
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बड़ा बाजार बहुत संकरा हो गया है। दुकानें भी बाहर तक लगी रहती हैं। ऑटो और ठेले वाले भी सड़क घेरे रहते हैं। त्योहारों पर बड़े वाहन कोहाड़ापीर और कोतवाली की तरफ से आने बंद कर दिए जाएं। अस्थाई पार्किंग का इंतजाम हो जाए तो ठीक रहेगा।
- अनमोल कपूर, कपड़ा व्यवसायी
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कुतुबखाना रोड पर शाम को ऑटो और ई-रिक्शा का आना-जाना प्रतिबंधित है। इसका ठीक से पालन नहीं हो रहा है। त्योहारों पर ट्रैफिक प्लान बना रहे हैं। इसे एक-दो दिन में लागू करा दिया जाएगा, ताकि आम लोगों को बाजार जाने में परेशानी न हो।
- जेएन अस्थाना, ट्रैफिक इंस्पेक्टर
कोट-
दिवाली पर पुलिस की सक्रियता बढ़ाई जा रही है। अतिक्रमण हटवाकर टेंपो, ई-रिक्शा को सड़क किनारे नहीं खड़ा होने दिया जाएगा। जल्द ही बाजार जाने का रास्ता चौड़ा कराया जाएगा।
- रोहित सजवाण, एसपी सिटी
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नगर निगम, बीडीए से लेकर पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। ऐसे में न तो अतिक्रमण हटेगा और न ही जाम खत्म होगा। दुकानों के आगे बने पायदान टूटने चाहिए। व्यापारी खुद भी जिम्मेदारी समझें।
- कौशल अग्रवाल, सराफा व्यवसायी