जिला अस्पताल में शुक्रवार को बड़ी अनहोनी होते- होते बची। इमरजेंसी की ऑक्सीजन सप्लाई सुबह 11 बजे अचानक बंद हो गई। इसे साढ़े तीन बजे तक शुरू ही नहीं किया। सांस के दो रोगी ऑक्सीजन के लिए परेशान रहें। स्टॉफ की लापरवाही और त्वरित कार्रवाई न करने से चार घंटे तक ऑक्सीजन सप्लाई शुरू करने में हीलाहवाली होती रही। शुक्र रहा कोई मरीज गंभीर नहीं था, नहीं तो बड़ी घटना हो सकती थी।
जोगीनवादा की गोमती (65) और श्यामलाल (60) को गुरुवार में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। श्यामलाल को सुबह 10 बजकर 55 मिनट पर और गोमती को साढ़े 11 बजे भर्ती कराया। इन्हें सांस और खांसी की दिक्कत के चलते डॉक्टराें ने ऑक्सीजन की जरूरत बताई थी। गोमती के बेटे राजेंद्र और श्यामलाल के बेटे गुड्डूू ने बताया कि इन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पर स्टॉफ को बताया लेकिन ऑक्सीजन शुरू नहीं हुई। स्टॉफ ने भी इसकी सूचना अस्पताल प्रशासन को दी, लेकिन तीन बजे तक सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। बाद में स्टॉफ ने भी गंभीरता से नहीं लिया। साढ़े तीन बजे सप्लाई शुरू हुई।
- खत्म हो गई गैस, चार घंटे बाद आई
इमरजेंसी में सप्लाई के लिए सौ लीटर के सिलिंडर से पाइपलाइन द्वारा गैस दी जाती है। छोटे- छोटे 50 सिलिंडर अलग से हैं। बड़ा सिलिंडर समाप्त होने पर सूचना अस्पताल प्रशासन को दी गई, उन्हाेंने चौपुला स्थित अशोका गैस को फोन कर गैस मंगवाया। लेकिन इस दौरान चार घंटे तक गैस का वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया गया। ऑक्सीजन सप्लाई का काम देख रहे लिपिक बाजपेयी ने बताया कि उनको दस बजे सूचना मिली तो एजेंसी को फोन किया, लेकिन यह नहीं बताया कि सप्लाई शुरू नहीं हुई। दूसरी सूचना तीन बजे मिली तो तुरंत सप्लाई शुरू करवाई।
- लापरवाही ले सकती थी जान
इमरजेंसी में 24 घंटे गैस की जरूरत होती है। इसमें स्टॉफ की लापरवाही सामने आ रही है। तत्परता न दिखाने से गंभीर मरीजाें की जान भी जा सकती थी।
वर्जन--
‘मुझे सिलिंडर खाली होने की सूचना मिली थी, जिसके लिए तुरंत एजेंसी को फोन करवाया था। लेकिन इतनी देरी हुई यह जानकारी नहीं मिली। इसकी जांच करवाऊंगी।’
डॉ. परवीन जहां, सीएमएस