बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मंगलवार को 10 दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम का शुभारंभ हुआ। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के प्रायोजन में यह कोर्स सामाजिक विज्ञान में शोध पद्धति और कौशल विकास: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विषय पर आयोजित किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में शोध की गुणवत्ता, मौलिकता और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर गहन चर्चा हुई।
कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार राय ने शोधार्थियों को जिम्मेदार और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सहयोगी हो सकता है, विकल्प नहीं। कुलपति ने कहा कि शोध केवल डिग्री या प्रकाशन का माध्यम न होकर सार्थक और परिणामदायक होना चाहिए।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर राज शरण शाही ने कहा कि मौलिकता अपनी भाषा में होती है। भारतीय दर्शन इसका प्रमाण है। उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शोध की गुणवत्ता को आवश्यक बताया। शोध को विकास का माध्यम बनाने पर जोर दिया ताकि समाज को वास्तविक लाभ मिल सके।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर अमिता वाजपेयी ने शोध प्रक्रिया में अनुभव और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व को बताया। प्रोफेसर आरएस पुंडीर ने शोध एवं ज्ञान के विभिन्न आयामों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर प्रो. संतोष अरोड़ा, डॉ. मीनाक्षी द्विवेदी, डॉ. राम बाबू सिंह व अन्य उपस्थित रहे।