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डिजिटलाइजेशन से बदलेगी दुनिया की सूरत 

Sat, 27 Jan 2018 09:31 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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conference on ditalisation
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 डिजिटलाइजेशन ने पूरी दुनिया की तस्वीर बदल के रख दी है और आगामी बीस वर्षों में हर वो चीज संभव होगी जो आज असंभव है। रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी का जिस तेजी से उपयोग बढ़ा है, आने वाले दिनों में रोबोट इंसानों की तरह कार्य करेंगे। बरेली कॉलेज के केमिस्ट्री विभाग की ओर से ‘डिजिटल इंडिया : इम्पॉवरिंग दि सोसाइटी’ विषय पर आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट मेय फह लंग यूनिवर्सिटी थाईलैंड के प्रोफेसर व एफएआई के वाइस प्रेजीडेंट प्रोफेसर सीसी टेन ने दुनिया में डिजिटलाइजेशन से बदलती तस्वीर पेश की। उन्हाेंने न्यूरल नेटवर्किंग में होने वाले डेवलपमेंट के बारे में बताया, इस तकनीक से रोबोट इंसानों की तरह सोच सकेंगे और कार्य करेंगे। भारत को लेकर बोले, भारत डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी देशों में शामिल हो गया है। डिजिटलाइजेशन के उन्होंने दुरुपयोग भी बताए, कहा कि जापान में इसी कारण 33 हजार लोगों को नौकरी गवानी पड़ी। एमएनआईटी इलाहाबाद के प्रोफेसर पंकज श्रीवास्तव बोले, हमारे देश में साक्षरता दर भले ही कम हो पर व्हाट्सऐप लिटरेसी शत प्रतिशत जरूर हो गई है। अनपढ़ भी सोशल मीडिया और ऑनलाइन लेनदेन कर रहे हैं। हालांकि ये दुर्भाग्य है कि हम यूजर बन रहे हैं और दुनिया हमारे यहां से बिलियन, ट्रीलियन डॉलर कमा रही है। हमारे देश को यूजर बनने की जगह ऐसे मोबाइल ऐप या सॉफ्टवेयर बनाने की जरूरत है जिसका इस्तेमाल दूसरे देश के लोग करें। वरिष्ठ पत्रकार प्रबल प्रताप ने अपने स्मरण गिनाते हुए कहा कि आज ढाबा, किराने की दुकानें, यहां तक छोटी छोटी दुकानों पर भी ऑनलाइन भुगतान की सुविधा है। अधिकारी पहले सुनते नहीं थे और आज पीएमओ ऑफिस में ऑनलाइन शिकायत पर जांच बैठ जाती है।
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इंटरनेट उपयोग में भारत नंबर वन
 बरेली कॉलेज के विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डीके सिंह ने कहा कि भारत में एक अरब से ज्यादा मोबाइल यूजर हैं। तीस फीसदी स्मार्टफोन प्रयोग करते हैं। इंटरनेट प्रयोग करने में भारत दुनिया में सबसे आगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इंटरनेट यूजर तेजी से बढ़े हैं। एक वक्त में हर तीन में से एक बच्चा ऑनलाइन कुछ न कुछ सर्च करते मिलेगा। कैशलेस, ई-लेनदेन, ऑनलाइन शॉपिंग, मोबाइल एप्स, एजूकेशन में तीस से पचास फीसदी की वृद्धि पिछले तीन वर्षों में हुई। तकनीकी सत्र में यूजीसी के एमीरेट्स प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना, विश्वविद्यालय के विधि विभाग के डॉ. अमित सिंह, ने भी डिजिलट इंडिया पर विचार रखे।  संचालन डॉ. शालिनी सिंह, डॉ. एसी त्रिपाठी ने किया। प्राचार्य डॉ. अजय  शर्मा ने अध्यक्षता की। सौ से ज्यादा रिसर्च स्कालर ने रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। डीयू से आई मानसी सिन्हा ने कैशलेस इकोनॉमी पर अपना पेपर प्रस्तुत किया। इस मौके पर डॉ. वंदना शर्मा, डॉ. एपी सिंह, डॉ. डीआर यादव, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. पीएन सक्सेना आदि लोग मौजूद रहे।
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