बरेली। साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट से ठगी का नया फंडा खोज लिया है। शहर की मेडिकल छात्रा के बाद ग्रीन पार्क निवासी व्यवसायी को ठगों ने शिकार बना लिया। दोनों मामलों में पुलिस ने पड़ताल की तो काफी समानता मिली। शहर में अक्सर लोगों के पास इस तरह की भ्रामक कॉल्स आ रही हैं। घबराहट में लोग ठगों को रकम डाल बैठते हैं।
पिछले दिनों ग्रेटर ग्रीन पार्क निवासी माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व कर्मचारी व अब शहर में रहकर व्यवसाय कर रहे शख्स के पास कॉल कर ठगों ने खुद को कस्टम इंस्पेक्टर बताकर कहा कि तुम्हारे नाम से एक कोरियर मलयेशिया भेजा जा रहा था, जो पकड़ गया है। पैकेज में ड्रग्स होने की बात कहकर डराया और 13.23 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। डराने के लिए ठगों ने व्यापारी का फोटो उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर लगाकर फर्जी दस्तावेज भी भेजे। एसएसपी के आदेश पर साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इससे पहले निजी मेडिकल कॉलेज की छात्रा को दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके आठ लाख से ज्यादा रकम की ठगी की जा चुकी है। पिछले दिनों शहर के निजी मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर डिजिटल अरेस्ट होते-होते बची थीं। आईजी के आदेश पर इस मामले में भी जांच हो रही है।
एक ही तरह का गिरोह कर रहा अपराध
दोनों मामलों में जांच से पता लगा है कि ठगी की कॉल मुंबई से आई थी। इसके अलावा देश के अलग-अलग प्रदेशों के खातों में यह धन भेजा गया है। प्राथमिक तौर पर दोनों मामलों में करीब 30-30 खातों में रुपया भेजने की पुुष्टि हुई है। किसी भी मामले में धन विदेश में ट्रांसफर नहीं हुआ है। सारा धन कई खातों में घूमते हुए डेबिट कार्ड से एटीएम पर जाकर निकाला गया है। यहीं साइबर टीम को कार्रवाई में उम्मीद की किरण दिख रही है।
ऐसे करते हैं डिजिटल अरेस्ट
साइबर ठग अमीर और प्रतिष्ठित लोगों को कॉल कर उन्हें बताते हैं कि आपके नाम से पार्सल भेजा गया है, जिसमें मादक पदार्थ, ड्रग्स या नकली पासपोर्ट मिला है। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें कमरे से बाहर निकलने से मना किया जाता है और वीडियो कॉल के जरिये जमानत देने या छोड़ने के बदले लाखों रुपये ट्रांसफर करा लिए जाते हैं। कई मामलों में ठग उनके संबंधियों को दुष्कर्म जैसे मामले में गिरफ्तार करने की फर्जी सूचना देते हैं और छोड़ने के बदले रुपये मांगते हैं।
मौका देखकर कॉल काटें, इंटरनेट बंद करें
साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह बताते हैं कि पुलिस कभी कॉल करके इस तरह रुपये नहीं मांगती। ऐसी कॉल आए तो ठगों की बातों में फंसने की बजाय उसे काट दें। मौका देखकर मोबाइल फोन या लैपटॉप का इंटरनेट कनेक्शन बाधित कर सकते हैं। इससे आपका ठगों से सीधा कनेक्शन खत्म हो जाएगा। सामान्य कॉल पर वह रुपये देने का दबाव उतना प्रभावी तरीके से नहीं बना सकेंगे। ऐसी स्थिति में तत्काल पुलिस को भी सूचना दें। ठगी या ठगी कोशिश होते ही टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें। cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ब्यूरो