बरेली। स्मार्ट सिटी की ऊंची-नीची सड़कों पर सफर मुश्किल भरा है। सड़कों की असमतल सतह जहां इंजीनियरिंग पर सवाल उठा रही है, वहीं इससे गुजरते समय जरा सा ध्यान चूका तो दोपहिया सवारों का लहराकर गिरना तय है। यह हाल तब है जबकि रोड इंजीनियरिंग के लिए नगर निगम के निर्माण विभाग में मुख्य अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता व अवर अभियंता तैनात हैं। हर माह उनके वेतन पर 27 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
हर साल सरकार भी सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए भारी-भरकम बजट देती है। हर महीने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक भी होती है, लेकिन इन बिंदुओं पर चर्चा नहीं होती। नगर निगम के मुख्य अभियंता डीके शुक्ला ने सहायक अभियंताओं से असमतल सड़कों को समतल कराने के निर्देश दिए हैं। यदि संबंधित सड़क किसी दूसरी एजेंसी की है तो उसे पत्र लिखकर अवगत कराने के लिए कहा है।
विशेषज्ञ की बात
मैं कर्मचारी नगर इलाके में रहता हूं। मिनी बाइपास चौराहे से प्रेम नर्सरी वाले मार्ग पर डामर से कंक्रीट रोड की सतह में तीन से छह इंच तक का फासला है। ऐसे में रफ्तार भरेंगे तो गिर पड़ेंगे। जिन्हें पहले से मार्ग की स्थिति का पता नहीं है, वे कई बार गिर चुके हैं। शहर के भीतर भी कुछ स्थानों पर मैंने सड़क की सतह में अंतर देखा है। - राजेंद्र आर्य, सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता
यहां भी ऊंची-नीची हैं सड़केंलोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय के बाहर काफी समय तक सड़क की सतह धंसी रही। जब मुख्यमंत्री का दौरा होना था तो उसे रातोंरात बनाया गया, लेकिन सतह ऊंची-नीची होने से खतरा बरकरार है। श्यामगंज से सेटेलाइट मार्ग पर मालियों की पुलिया से पहले पेट्रोल पंप के सामने ही सड़क समतल नहीं है। एक स्थान पर सड़क धंसने के बाद ठीक नहीं कराई गई। हादसे से बचाव के लिए संकेतक भी नहीं लगे हैं।