बरेली। कलक्ट्रेट पर आत्मदाह की कोशिश के मामले की पड़ताल में सच्चाई बिल्कुल अलग मिली। प्रारंभिक जांच में ही कथित रूप से पीड़ित और असहाय दिख रहे परिवार की जिद व दबंगई सामने आ गई। पता चला कि परिवार ने जमीन बेचने के बाद भी कब्जा नहीं छोड़ा है। अब पड़ोसी के आंगन से रास्ता मांग रही हैं। इस राजफाश के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली।
डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर इशिता किशोर व तहसीलदार भानुप्रकाश ने जांच की तो पता लगा कि लड़ाई दो गाटा नंबर को लेकर है। नरेशपाल की पत्नी कमलेश ने एसडीएम को बताया कि उनके गाटा संख्या 139 में आने-जाने का रास्ता पड़ोसी राजवीर सिंह बंद कर रहे हैं। पैमाइश कराने पर पता लगा कि कमलेश का प्लॉट गाटा संख्या 139 में है। राजवीर सिंह का घर गाटा संख्या 145 में है जो मुख्य सड़क की ओर है और कमलेश का घर इसके पीछे की ओर है। वहां निकासी का एक ही रास्ता है। नक्शा व रिकाॅर्ड में गाटा संख्या 139 व 145 के बीच कोई रास्ता नहीं है।
इसलिए बुधवार को जब राजवीर ने अपने आंगन में कमरा बनाने के लिए नींव की खोदाई की तो कमलेश व उसके परिवार ने हंगामा कर दिया। कमलेश की सूचना पर पहले यूपी 112 की गाड़ी पहुंची। पीआरवी स्टाफ ने विवाद निपटाने की कोशिश की, लेकिन कमलेश पक्ष आठ फिट का रास्ता मांगने पर अड़ा रहा। तब पीआरवी ने ही बभिया चौकी प्रभारी हरेंद्र प्रताप को सूचना दी। उनके साथ चौकी के दरोगा राकेश भी आए। इनसे भी कमलेश व उसकी जेठानी उलझ गईं। बात न बनी तो लेखपाल को बुलाने की बात कहकर महिलाएं परिवार के साथ घर से निकलीं और सीधे कलक्ट्रेट चली आईं।
विपक्षी राजवीर ने बताया कि गाटा संख्या 139 में कमलेश के परिवार के कई लोग सह खातेदार हैं, जबकि गाटा संख्या 145 पर राजवीर सिंह का नाम संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज है। गाटा संख्या 139 में से 60 वर्गगज जमीन राजवीर ने जून माह में खरीदी थी। यह जमीन कमलेश के पति ने 2001 में प्रेमा देवी को बेची थी। अब कमलेश का परिवार ये जमीन भी नहीं छोड़ रहा। कमलेश ने सिविल न्यायालय में वाद दायर कर रखा है।
राजवीर ने ये कराई रिपोर्ट
राजवीर सिंह ने रिपोर्ट में जिक्र किया है कि बुधवार सुबह वह अपने आंगन में नींव भरवा रहे थे। तभी गांव के आशुतोष, निर्दोष, कमलेश, रोशनी, मोनू, देशराज और सूर्य प्रताप वहां आए। उनकी जमीन के बीच आठ फीट चौड़ा रास्ता मांगा। पुश्तैनी जमीन से रास्ता देने से मना करने पर आरोपी गाली-गलौज करने लगे। जब राजवीर सिंह ने विरोध किया तो आरोपियों ने उनकी पिटाई शुरू कर दी। धमकी दी कि वे रास्ता तो उनकी जमीन से ही लेंगे, वर्ना जान से मार देंगे। राजवीर डर गए और भागकर अपनी जान बचाई।