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धान खरीद में फर्जीवाड़ाः सरकारी तंत्र और आढ़तियों का गठजोड़ लूट रहा काश्तकारों को

Wed, 30 Oct 2019 10:12 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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धान खरीद - फोटो : अमर उजाला
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सरकारी सिस्टम और आढ़तियों के गठजोड़ से एक बार धान खरीद में फर्जीवाड़ा शुरू हो गया है। खरीद सेंटरों पर धान की बिक्री के लिए एक तो किसानों के रजिस्ट्रेशन ही काफी कम हैं। जिन्होंने पंजीकरण करा भी लिए हैं, उनका सत्यापन नहीं हो रहा है।

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सरकारी केंद्रों पर बिक्री के लिए आने वाले धान में अत्यधिक नमी सहित दूसरी खामियां बता कर स्टाफ काश्तकारों को लौटा रहा है। मजबूरी में किसान धान को कम रेट पर आढ़तियों के हाथ बेच रहे हैं। बाद में इसी धान को खरीद सेंटरों पर सरकारी खरीद में दिखाकर गोलमाल किया जा रहा है।

सरकारी सेंटरों पर धान बेचने के लिए सभी किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना है। इसमें उनका खतौनी, रकबा, उपज की मात्रा सहित कई महत्वपूर्ण सूचनाएं दर्ज करानी होती हैं। इसके बाद संबंधित तहसील प्रशासन इन सूचनाओं को सत्यापन करता है। उसके बाद किसान धान बिक्री के लिए पात्र होता है। अभी 15 हजार किसानों ने ही रजिस्ट्रेशन कराए हैं, जबकि कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब तीन लाख किसान हैं।
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इसमें खेल यह चल रहा है कि एक तो किसान रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे, दूसरे सत्यापन के नाम पर तहसील स्टाफ उन्हें दौड़ा रहा है। जैसे-तैसे यह पंजीकरण का सत्यापन भी हो जाए तो सरकारी केंद्रों पर कर्मचारी धान में नमी या अत्यधिक टूटन बताकर खरीद नहीं कर रहे हैं। लिहाजा काश्तकार 1815 रुपये के सरकारी भाव पर धान नहीं बेच पा रहे।

मजबूरी में वह आढ़तियों को 1400 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से धान बेच रहे है। इसमें खेल यह है कि आढ़ती कम रेट पर धान लेकर बाद में उसे सरकारी सेंटरों के स्टाफ से मिलकर किसानों के फर्जी नाम से सरकारी खरीद दिखा रहे हैं। इससे तीन से चार सौ रुपये प्रति क्विंटल के मुनाफे का बंदरबांट हो रहा है।

सरकारी एजेंसियों को करनी है 1.56 लाख टन धान की खरीद
जिले में 79 सरकारी केंद्रों के माध्यम से इस बार 1.56 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान की खरीद करनी है। एक अक्तूबर से खरीद शुरू होने के बावजूद अब तक करीब 9000 एमटी ही धान खरीद हुई है। अधिकारियों का कहना है कि हर साल दिवाली बाद ही धान की खरीद गति पकड़ती है।

धान की सफाई के नाम पर भी किसानों का शोषण
धान को गंदा बताकर उसकी सफाई के नाम पर भी सरकारी केंद्रों पर प्रति क्विंटल 40 से 50 रुपये की कटौती की जा रही है, जबकि शासन ने 20 रुपये प्रति क्विंटल रेट तय कर रखा है।

धान किसानों के रजिस्ट्रेशन और सत्यापन के साथ खरीद की स्थिति की समीक्षा होगी। इसमें कहीं गड़बड़ी हो रही है तो कार्रवाई की जाएगी। कम खरीद पर भी संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा जाएगा। - वीके सिंह, एडीएम प्रशासन/ नोडल धान खरीद

कम खरीद पर कमिश्नर नाराज, मंडल के चारों डीएम को नोटिस
मंडल में धान की खरीद की स्थिति बेहद खराब है। कमिश्नर ने समीक्षा के दौरान इस पर नाराजगी जताते हुए मंडल के चारों डीएम को नोटिस जारी कर कम खरीद की वजह बताने के निर्देश दिए हैं। इस साल मंडल में बरेली सहित शाहजहांपुर, बदायूं और पीलीभीत जिले को 849000 मीट्रिक टन धान की खरीद करनी है, जबकि कमिश्नर ने हाल में समीक्षा के दौरान पाया कि अब तक 20 हजार मीट्रिक टन भी खरीद नहीं हो सकी है।

इस पर कमिश्नर ने सभी जिलाधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए यह रिपोर्ट मांगी थी कि उनके जिलों में कितने सरकारी सेंटर क्रियाशील है और उन पर पूरी व्यवस्थाएं हैं भी या नहीं। इसकी एसडीएम और जिला स्तरीय अधिकारियों से चेकिंग कराकर रिपोर्ट भेजें।

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