मीरगंज। अंग्रेजी शासन काल में फसलों की सिंचाई के लिए निर्मित ढकिया डैम अब क्षतिग्रस्त हो गया है। फसलों की सिंचाई के लिए पानी न मिलने से क्षेत्र के किसानों की खेती प्रभावित हो रही है। डैम के ऊपर से बनाया गया मार्ग अब बदहाल हो गया है, जो हादसे को दावत दे रहा है। इस पर संबंधित विभाग द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि सन् 1925 में किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए अंग्रेजों ने ढकिया डैम का निर्माण कराया था। सैकड़ों गांवों की हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई इसी नहर के पानी से किसान करते थे। डैम के फाटक टूटे होने के कारण नहर में पानी नहीं जाता है, जबकि सिंचाई विभाग नहरों की सफाई के लिए हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करता है। ढकिया डैम से सहोड़ा, बसई, गनेशपुर सुल्तानपुर, दुनका, दुनकी, आनंदपुर, अक्सौरा, फिदाईपुर, परतापुर, मिर्जापुर समेत दर्जनों गांवों तक पानी नहरों के माध्यम से जाता था। किसान नहर से फसलों की सिंचाई कर कम लागत में फसलें पैदा करते थे, लेकिन 1990 से ढकिया डैम के फाटक टूटे पड़े हैं, लेकिन विभाग फाटक की मरम्मत तक नहीं करा सका है।
कई बार लिखा पत्र, सुनवाई नहीं
पूर्व विधायक व किसान नेता जयदीप सिंह बरार ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों को पत्र लिखकर मरम्मत कराने की आवाज उठाई, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई, जबकि वह किसान कल्याण समिति की ओर से अपने निजी खर्चे पर खमरिया पश्चिमी बहगुल नदी पर प्रतिवर्ष कच्चा बांध बनाते हैं।
नहर की जमीन पर जगह-जगह कब्जा
सिंचाई विभाग की सैकड़ों बीघा जमीन पर नहर बनी हुई है। रखरखाव के अभाव में जगह-जगह लोगों ने कब्जे कर नहर की जमीन अपने खेतों में मिला ली है। कुछ जगह पर टिनशेड डालकर व कई जगह पक्के निर्माण कर कब्जा कर लिया गया है, लेकिन सिंचाई विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
डैम के ऊपर से बनी सड़क जर्जर
ढकिया डैम के ऊपर से कई गांवों को जोड़ने के लिए बना मार्ग जर्जर हालत में है। विभाग ने एक बोर्ड लगा रखा है, जिसमें बताया गया है कि रेग्युलर का पुल क्षतिग्रस्त है। भारी वाहन प्रतिबंधित हैं। इस मार्ग से दर्जनों गांवों के लोग गुजरते हैं। पुल ठीक न होने से बड़ा हादसा हो सकता है।
ऐसा कोई मामला नहीं है। लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। पानी लगातार दिया जा रहा है। मुद्दे को बेवजह राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
नवीन कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, रुहेलखंड नहरखंड