बरेली। हजरत शाहदाना वली मियां के सात दिवसीय उर्स के बीच रविवार को कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसमें अंकीदतमंदों ने चादर पेश की।
उर्स की शुरुआत सुबह तिलावत-ए- कलाम पाक से हुई। इसके बाद दरगाह पर संदल पेश किया गया और मोहम्मद सलीम ने सलातो सलाम का नजराना पेश किया। इस मौके पर दरागह के मुतवल्ली अब्दुल वाजिद खां नूरी ने कहा कि हिंदुस्तान सूफी संतों की सरजमी है। इस मौके पर नबीरे आला हजरत मौलाना अल्हाज तौकीर रजा खां ने कहा कि मुसलमान नमाज की पाबंदी करें, बच्चों को दीनी और दुनियावी दोनों तालीम देने और गरीबों की मदद करने पर जोर दिया। बाद में दरगाह कमेटी की ओर से मुतवल्ली ने तौसीफ मिंयां को शाल उढ़ाई और दस्तारबंदी सम्मानित किया। दोपहर बाद महफिल-ए-समा का आयोजन किया गया। इसमें सूफियाना कलाम के बाद फनकार निजाम साबरी ने रंग पेश किया। इसके बाद खानकाह तहसीनिया के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रजा खां ने फातेहा पढ़ी। शाम को महफिल में चंदा मियां ने अपने साथियों के साथ नात व मनकबत पेश किया। रात को कव्वाली की महफिल में कव्वालों ने रूहानी कलाम पेश किए। इस दौरान सपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. अनीस बेग, सपा नेता इंजीनियर अनीस खां, शहर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी, के अलावा सैफ वली खान, भाजपा नेता डॉ. एसई हुदा ने चादर पेश की।