बरेली। वन भूमि को लेकर सेतु निगम का एक और प्रोजेक्ट फंस गया है। मूढ़ा-फरीदपुर के मध्य रामगंगा नदी पर पुल निर्माण में भी कुछ वन भूमि आ रही है। इसके बदले वन विभाग को गांव खलपुर में उतनी ही जमीन दी जानी है। चिह्नित भूमि किसकी मिल्कियत है, इस पर सेतु निगम ने एसडीएम फरीदपुर से रिपोर्ट देने का आग्रह किया है। इससे पहले शाहजहांपुर रोड पर नकटिया नदी पर भी वन भूमि का अड़ंगा लग जाने से निर्माण कार्य रुका है। वन भूमि का इस्तेमाल करने की अनुमति वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मिलने में महीनों तो कभी-कभी कई साल भी लग जाते हैं, ऐसे में विकास के प्रोजेक्ट अटके रहते हैं।
रामगंगा पर मूढ़ा-फरीदपुर में पुल का निर्माण कराने के लिए चैनेज 2.334 से 2.548 किलोमीटर के मध्य 0.1819 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि का उपयोग किया जाना है। इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने के लिए इस वन भूमि के बराबर क्षतिपूरक पौधरोपण करना है। इसके लिए ग्राम खलपुर में जमीन चिह्नित की गई है। सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक वीके सेन ने एसडीएम फरीदपुर को इस संबंध में पत्र भेजकर यह रिपोर्ट देने का आग्रह किया है कि क्षतिपूरक पौधरोपण के लिए चिह्नित भूमि कहीं वन विभाग की तो नहीं है। इस लंबी प्रक्रिया से पुल का काम फंसा हुआ है। इधर, शाहजहांपुर रोड पर नकटिया नदी पर पुल निर्माण वन विभाग से एनओसी न मिल पाने की वजह से लटका हुआ है। वन विभाग के अधिकारियों ने सेतु निगम को पहले सात लाख का एस्टीमेट भेजा था। इसके बाद इसे बढ़ाकर 74 लाख कर दिया गया। सेतु निगम ने इसे लेकर डीएम नितीश कुमार को चिट्ठी भेजकर रिवाइज एस्टीमेट को कम कराने का आग्रह किया था लेकिन एनओसी न मिल पाने से ये काम लटका हुआ है।