बरेली। नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही से शहर में होने वाले 40 करोड़ रुपये के विकास कार्य अटक गए हैं। इसके तहत शहर के वार्डों की सड़कें व नालियां बननी थीं। इसके टेंडर भी हो गए, टेक्निकल के साथ ही फाइनेंशियल बिट भी खुल गई, लेकिन वर्कआर्डर पर हस्ताक्षर न होने के कारण विकास कार्य शुरू नहीं हो सके। अब आचार संहिता लागू होने का अड़ंगा बताया जा रहा है। पार्षदों का कहना है कि आचार संहिता के नाम पर अधिकारी अपनी नाकामी छिपा रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि अधिकारियों ने जानबूझकर विकास कार्य शुरू नहीं कराए।
स्थिति ये है कि शहर के विभिन्न वार्डों में सबसे ज्यादा दिक्कत टूटी सड़कों व नालियों की है। कई इलाके तो ऐसे हैं जहां अर्से से नालियां नहीं बनी हैं। इसी क्रम में निगम को पुराने कुछ कामों को मिलाकर 40 करोड़ रुपये के कामों का प्रस्ताव मिला था। इसके तहत 200 कामों के एवज में 107 टेंडर ही हो सके। एक टेंडर में कम से कम तीन फर्मों की शर्तें पूरी न होने के कारण 93 टेंडर नहीं हो सके। बाकी कामों के टेंडर के लिए नगर निगम ने विज्ञापन प्रकाशित करवाए ही थे कि आचार संहिता लग गई।
वहीं जिन 107 कामों के टेंडर पड़े थे उनकी फाइनेंशियल बिड खोलने में भी काफी देरी की गई। महज 50 कामों की फाइनेंशियल बिड ही खोली गई। इनके अनुबंध भी हुए, लेकिन वर्कआर्डर यानी कार्यादेश जारी नहीं हो सका। अगर इन 50 फाइलों का कार्यादेश जारी हो जाता तो इन्हीं का काम शुरू हो जाता। क्योंकि ये 50 काम ही करीब 10 करोड़ रुपये के हैं। ऐसे में अब विपक्षी सपा दल के पार्षदों का कहना है कि निगम के अधिकारियों ने जानबूझ कर काम को फंसाया है।
पार्षदों ने 40 करोड़ के 200 कामों का दिया था एस्टीमेट
शहर के 80 वार्डों में 30-30 लाख रुपये तक के काम नगर निगम की निधि से होने थे। पार्षद 50-60 लाख रुपये तक के भी काम करा सकते थे, लेकिन इनमें एक काम की कीमत 30 लाख रुपये से ज्यादा की नहीं होनी चाहिए थी। पार्षदों ने जरूरत के हिसाब से कामों का एस्टीमेट तैयार कर फाइल बनाकर नगर निगम में दी थीं। कुल 40 करोड़ के काम पार्षदों ने दिए थे।
आचार संहिता हटेगी तो आ जाएगा मानसून
पार्षदों का कहना है कि विकास कार्य अब छह महीने से पहले नहीं हो पाएंगे। वजह ये है कि आचार संहिता अब जून में हटेगी। जून से मानसून आ जाएगा। सड़कें व नालियों का काम होना है। बरसात में यह काम हो नहीं पाएगा। मतलब साफ है कि छह महीने तक के लिए अब काम अटक गए।
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जानबूझकर की गई देरी: गौरव
सपा पार्षद दल के नेता गौरव सक्सेना का कहना है कि 30-30 लाख रुपये के काम नगर निगम की निधि से होने हैं। लोकसभा चुनाव फरवरी के बाद कभी भी हो सकते हैं, ये सारे अधिकारियों को पता था। चूंकि मामला जनता की सुविधाओं का था तो लापरवाही की सारी हदें पार कर दी गईं। अधिकारियों ने अपने हित के सारे काम आचार संहिता से पहले ही कर लिए होंगे।
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पार्षदों की मेहनत पर फेरा पानी: शालिनी जौहरी
भाजपा पार्षद दल की नेता शालिनी जौहरी भी इस मुद्दे को लेकर काफी मुखर हैं। उनका कहना है कि पार्षदों ने खासी मेहनत करके एस्टीमेट बनवाए, फाइलें तैयार की। कई के टेंडर भी हो गए। निर्माण विभाग ने अड़ंगे लगाने में कसर नहीं छोड़ी। अधिकारियों ने फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं किए। अधिकारियों ने पार्षदों की मेहनत पर पानी फेर दिया। चुनाव के मौसम में शहर के विकास के काम रुक गए।