शहामतगंज से सेटेलाइट तक सड़क को फोरलेन किए जाने का प्लान आधा अधूरा है। सबसे पहले तो सड़क का इस्टीमेट बनाने में ही खामियां नजर आ रही हैं। पहले 14 सौ मीटर लंबी सड़क को केवल दोनों साइड से तीन-तीन मीटर चौड़ा करने का प्रावधान किया गया। बाद में चौड़ीकरण के इस्टीमेट में पीडब्ल्यूडी के मानकों में कटौती करके 1.5 करोड़ का साइकिल ट्रैक निकाल दिया गया। सड़क और साइकिल ट्रैक के बीच में आने वाले करीब 30 बिजली के पोल, चार ट्रांसफार्मर और पेड़ शिफ्टिंग का का कोई जिक्र नहीं है। सड़क निर्माण में क्या इस्तेमाल किया जा रहा है यह भी इंजीनियरों ने अबतक ठीक से नहीं देखा है।
शहामतगंज-सेटेलाइट फोरलेन चौड़ीकरण में इस्टीमेट के प्रावधान अलग हैं जबकि वास्तविक धरातल पर काम मनमाने तरीके से हो रहा है। सड़क का चौड़ीकरण करने के लिए पत्थर की कुटाई और भराई (बीएम) से लेकर एडीबीसी (फाइनल लेयर) डालने तक में पीडब्ल्यूडी के मानकों के रेट लगाए गए हैं। वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। पहली बात तो यह है कि साइकिल ट्रैक चौड़ीकरण के इस्टीमेट में ही शामिल नहीं है। दूसरी बात ये कि चौड़ीकरण में पीडब्ल्यूडी के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।
पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड इंजीनियर के मुताबिक सड़क के फोरलेन चौड़ीकरण में 45 से 90 एमएम का पत्थर और 1.9 से 2.39 क्यूबिक मीटर से कोलतार डालने का मानक है। अगर सड़क की बजरी बनते ही उखड़ने लगी है तो उसमें 25 से 63 एमएम के पत्थर और 1.9 क्यूबिक से कम कोलतार का इस्तेमाल हो रहा है। रिटायर्ड इंजीनियर के मुताबिक किसी भी सड़क को फोरलेन करने से पहले बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर और रास्ते में पड़ने वाले पेड़ या अन्य अतिक्रमण हटाना इस्टीमेट में शामिल करना जरूरी है। इन मानकों को पूरा किए बिना सड़क का चौड़ीकरण करना नियम विरुद्ध है। क्योंकि रोलर ऐसे अवरोधकों तक नहीं पहुंच पाता। ठेकेदार पोल, ट्रांसफार्मर या अन्य अवरोधकों के किनारे बीएम हाथ की मशीन से कराते हैं। आम तौर पर ऐसी सड़क कमजोर रहती है और छह महीने भी नहीं चलती।
‘सड़क के चौड़ीकरण इस्टीमेट में बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर और अन्य अवरोधक हटाने का प्रावधान न होना समझ में नहीं आता। इसकी जांच कराई जाएगी। सड़क निर्धारित मानक से ही बनेगी।’ डा. शशांक विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए