बरेली। सांसद निधि पटल का काम पाने के लिए बाबुओं में मारामारी मची है। बाबू सांसद से लेकर विधायकों तक का जुगाड़ लगाने में जुट गए हैं। दरअसल यह देखने वाले सीनियर लेखाकार अशोक कुमार 31 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में बाकी बचे बाबुओं में मारामारी मची है। विधायक निधि का पटल देखने वाले बाबू सांसद निधि का पटल देखने के लिए भी जोड़-तोड़ में लग गए हैं। सांसद निधि का पटल डीडीओ दफ्तर के किसी बाबू या बाहर से अनुबंध पर रखे गए कर्मचारी से दिखवाया जा सकता है।
डीआरडीए में सांसद और विधायक निधि के पटल मलाईदार माने जाते हैं, क्योंकि इन निधियों से स्वीकृत काम कराने के लिए प्रस्ताव पटल बाबू ही तैयार करते हैं। जब भी कोई सांसद या विधायक काम के प्रस्ताव भेजते हैं तो बाबू तब तक उस प्रस्ताव लटकाए रखते हैं, जब तक कि उनके ऊपर वजन नहीं रखा जाता। दूसरी ओर कार्यदाई संस्था जैसे आरईएस, पॉवर कारपोरेशन या अन्य संस्थाओं के कर्मचारी या ठेकेदार भी इन बाबुओं से ही संपर्क करते हैं। जब तक बाबू सांसद या विधायक निधि के पटल देखते हैं, तब तक उनकी चांदी रहती है। अफसरों का कहना है कि सांसद निधि के काम दूसरी विभाग के बाबू या अनुबंध पर रखे गए कर्मचारी से कराएंगे।