दोषी अफसरों पर कार्रवाई के बजाय मरम्मत के नाम पर हो रही लीपापोती
बरेली। करीब 11 करोड़ की राशि से भवन निर्माण में गोलमाल करने वाले पैक्सफेड के जिम्मेदारों पर कार्रवाई के बजाय मरम्मत के नाम पर भवनों की लीपापोती हो रही है। प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने खुद इस घपले को पकड़ा था, फिर भी अफसर कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
वर्ष 2014-15 में पैक्सफेड संस्था को सदर, फरीदपुर और बहेड़ी में नए तहसील भवनों के निर्माण का जिम्मा दिया गया था। प्रत्येक बिल्डिंग के लिए 3.40 करोड़ का बजट आवंटित हुआ था। इसके निर्माण में हुए गोलमाल को अफसर दबाकर बैठ थे लेकिन नवंबर में प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने जब बहेड़ी के नवनिर्मित तहसील भवन की खराब गुणवत्ता देखकर नाराजगी जताई। समीक्षा बैठक में भी उन्होंने इस गड़बड़ी के लिए अफसरों को फटकार लगाई। इस पर पैक्सफेड के अफसरों तहसील प्रशासन को भवन हस्तांतरित होना बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। इस पर सहगल ने स्पष्ट किया था कि बिल्डिंग हैंडओवर होने के बाद भी निर्माणदायी संस्था की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। इसके बाद सदर और फरीदपुर में भी तहसील भवनों के घटिया निर्माण सामने आ गए। सदर तहसील में तो एसडीएम ईशान प्रताप सिंह ने डीएम को रिपोर्ट भेजकर आजादी से पहले बनी तहसील की पुरानी बिल्डिंग को नए भवन से बेहतर बता दिया। बहेड़ी के एसडीएम विशु राजा ने भी नई बिल्डिंग की गुणवत्ता खराब होने की डीएम को रिपोर्ट दी। इससे जाहिर हो गया कि पैक्सफेड ने 11 करोड़ से ज्यादा के कामों में गड़बड़ी की है। यह गड़बड़ी उजागर होने के बाद अब पैक्सफेड इन बिल्डिंग की मरम्मत के नाम पर लीपापोती करने में जुटी है।
डीएम ने दिए थे एफआईआर के निर्देश
पिछले दिनों समीक्षा बैठक में डीएम नितीश कुमार ने घटिया निर्माण कराने वाली निर्माणदायी संस्थाओं पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। डीएम ने खासतौर से पैक्सफेड और सीएंडडीएस संस्थाओं को निशाने पर लिया था। इसके बावजूद अफसर कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधकर बैठे हैं।