गांधी जयंती पर साफ-सफाई का अभियान हो या गांवों को शौच मुक्त करने की योजना। प्रशासन ने इन्हें सफल बनाने के लिए भाजपा नेताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम किया लेकिन शराब बंदी के मुद्दे पर प्रशासनिक अमला फेल हो गया। गांधी जयंती पर शराब की बिक्री प्रतिबंधित करने के लिए आदेश तो जारी कर दिया गया लेकिन उस पर अमल कराने की ओर ध्यान ही नहीं दिया गया। सोमवार को पूरे दिन शहर में चोरी छिपे सही लेकिन खूब शराब बिकी। रात में भी बिना शटर खोले ऊंचे दामों पर शराब बेची गई। सूचना पर पुलिस भी पहुंची लेकिन खाली हाथ लौट आई।
अयूब खां से चौपुला चौराहे के बीच पड़ने वाली शराब की दुकान के बाहर दिन भर भीड़ लगी रही। यहां बिना शटर खोले शराब बेची जा रही थी। देर शाम आठ बजे के बाद हिंद टाकीज के सामने दुकान पर भी शराब बिकती मिली। यहां पीने वालों की भीड़ लगी थी। उन्हें डेढ़ से दो गुने दामों पर शराब बेची जा रही थी। सूचना पर चीता पुलिस जब हूटर बजाते हुए पहुंची तो लोग भाग निकले। जंक्शन के पास एक अस्पताल के सामने गली में भी गेट बंद होने के बाद भी लोगों को दोगुने दामों पर शराब बेची जा रही थी। अमर उजाला के फोटोग्राफर ने जब फोटो खींचा तो फ्लैश चमकते ही शराब खरीद रहे लोग भाग खड़े हुए। शराब बेच रहा व्यक्ति भी अंदर भाग गया। आसपास के काफी लोग यहां शराब लेने पहुंचे थे। इसके अलावा किला और आसपास के इलाकों में भी शराब की बेरोकटोक बिक्री होती रही।
गांधी जयंती पर शराब की बिक्री पूर्णतया प्रतिबंधित है। अगर शहर में शराब बेची गई है तो यह गलत है। ऐसा करने वालों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई होगी।
- यूपी सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
तीन जगहों से शराब बिक्री की सूचना मेरे पास आई थी। इस पर पुलिस को मौके पर भेजा गया। इसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी और संबंधित दुकानों के लाइसेंस निरस्तीकरण की सिफारिश की जाएगी।
- रोहित सिंह सजवाण, एसपी सिटी