बदायूं। पुलिस व यातायात पुलिस ने जमकर जागरूकता अभियान चलाया। बावजूद इसके पांच सालों में 20 फीसदी सड़क हादसों में इजाफा हुआ है। वहीं मरने वालों की संख्या भी 22 फीसदी तक बढ़ गई है।
हर माह सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें होती हैं। यहां दिए गए निर्देश और किए गए दावे मौके पर हवा-हवाई साबित होते हैं। यही वजह रही कि जिला अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक्सीडेंट जोन में शामिल हो चुका है। प्रदेश में 2025 में सर्वाधिक हादसे वाले जिन 20 जिलों को चिह्नित किया गया है, उसमें बदायूं 18वें स्थान पर है।
जिले में शायद ही कोई दिन ऐसा हो जिस दिन हादसे में किसी की जान न गई हो। महीने में औसतन 35-40 लोगों की मौत हो रही है। इस साल जनवरी से अक्तूबर तक 537 सड़क हादसों में 329 लोगों की जान चली गई है। इसके बाद जिले को हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया। साल भर जिले में चेकिंग अभियान चलाया गया। लोगों को जागरूक किया गया, लेकिन जिले में होने वाले हादसों में कोई कमी नहीं आई। पांच साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो हादसों में 20 फीसदी और मरने वालों की संख्या में 22 फीसदी की बढ़ोतरी सामने आई है। (संवाद)
हर माह जा रहीं 35 से 40 लोगों की जान
सड़क सुरक्षा के उपायों को पालन कराने और लोगों को जागरूक करने के लिए जिले में 22 थाने और यातायात पुलिस का नेटवर्क है। जिले में 2,400 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। शहर में ट्रैफिक नियंत्रण के लिए यातायात पुलिस की अलग से व्यवस्था है। इसके अलावा परिवहन विभाग भी चेकिंग अभियान चलाता है। बावजूद इसके सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है। सबसे अधिक हादसे उझानी, वजीरगंज, बिसौली के रानेट, अलापुर, दातागंज रोड व ककराला रोड पर दर्ज किए गए हैं। हादसों में प्रतिमाह मरने वालों की संख्या 40 के पार पहुंच गई है। परिवहन विभाग के आंकड़े भी यही बयां कर रहे हैं।
जिले में 42 ब्लैक स्पॉट
वर्तमान में जिले में 42 ब्लैक स्पॉट हैं। इनमें मलगांव रेलवे क्रॉसिंग, घटपुरी, बुटला दौलत, खेड़ा नवादा चौराहा, एआरटीओ चौराहा, राजकीय मेडिकल कॉलेज तिराहा, रानेट चौराहा, हतसा, ओरछी चौराहा, खंदक, उस्मानपुर, मुजरिया चौराहा, कौल्हाई, उघैनी पुलिया आदि ब्लैक स्पॉट हैं।
शून्य मृत्यु दर का मिला है लक्ष्य
सड़क हादसों में बढ़ती मौतों को देखते हुए जिले में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने पर शासन का जोर है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के शून्य मृत्यु दर योजना में जिले को शामिल किया है। 11 थाना क्षेत्रों में क्रिटिकल कॉरिडोर टीम (सीसीटी) गठित करने का निर्देश दिया है। प्रत्येक सीसीटी में एक दरोगा और चार आरक्षी तैनात किए जाएंगे। टीम को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह टीम सड़क दुर्घटना के मामलों में मौके पर जाकर मदद करेगी। सड़क हादसों से संबंधित मामलों की जांच भी यही टीम करेगी। टीम को समय-समय पर विभिन्न परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
पांच साल के आंकड़े
सन कुल हादसे मरने वालाें की संख्या घायलों की संख्या
2020 446 327 312
2021 497 351 354
2022 566 376 418
2023 576 349 452
2024 618 396 451
2025 537 329 493 अक्तूबर माह तक
यातायात माह चल रहा है। लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। नियमों का पालन न करने वाले लोगों पर कार्रवाई भी लगातार की जा रही है। हादसों को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अगर लोग अपने परिवार का ध्यान रखकर वाहन चलाए तो हादसे स्वत: घट जाएंगे। - आरएल राजपूत, यातायात निरीक्षक
यातायात माह में रैली निकालकर जागरूक करती याता यात पुलिस। फाइल फोटो।- फोटो : सिरसागंज में परचून की गोदाम में मिला पटाखों का जखीरा। स्रोतः पुलिस