फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकारी शर्तों पर बिल्डरों का इनकार.. तो कैसे हो घर का सपना साकार

Fri, 22 Dec 2017 01:54 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
‘सबका सपना, घर हो अपना’ नारे के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना में 2022 तक हर बेघर को घर देने के लक्ष्य में फिलहाल पेच फंस गया है। दरअसल सरकारी शर्तों पर बिल्डरों ने गरीबों के लिए ईडब्ल्यूएस मकान बनाने से हाथ खडे़ कर लिए हैं, लिहाजा सरकारी सिस्टम सबको घर देने की स्थिति में ही नहीं रह गया है। उधर, पीएम योजना में आवास के लिए डूडा में अब तक 46 हजार आवेदन आ चुके हैं। डूडा ने पहले चरण के सर्वे में चयनित 1500 लाभार्थियों की सूची बीडीए को भेजी है। बीडीए के पास मात्र 150 मकान ही बने हैं। ऐसे में सबको घर देने का सपना कैसे पूरा होगा, यह फिलहाल अधिकारी ही नहीं बता पा रहे हैं। 
विज्ञापन

 पीएम आवास योजना में वर्ष 2016 से ऑनलाइन आवेदन लिए रहे हैं। अब तक नगर निगम क्षेत्र में 28 हजार और ग्रामीण क्षेत्र से 18 हजार आवेदन मिल चुके हैं। सरकार से नामित एजेंसी से आवेदकों का सत्यापन कराया जा रहा है। अंतिम सत्यापन में आवेदकों की संख्या घट-बढ़ भी सकती है। एजेंसी ने प्रथम चरण के लाभार्थियों का सत्यापन पूरा कर 1500 लाभार्थियों की सूची बीडीए को भेजी है। मगर बीडीए फिलहाल इनको भी आवास देने की स्थिति में नहीं है। दरअसल बीडीए ने पीएम आवास योजना के लाभार्थियों को मकान देने के लिए रामगंगा नगर आवासीय योजना में एक हजार ईडब्ल्यूएस आवास बनाने का लक्ष्य रखा है। प्रथम चरण में 254 आवास बनाने का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट शासन को दो माह पहले भेजी गई है। फिलहाल रामगंगा नगर में मात्र 150 ईडब्ल्यूएस मकान ही बने हैं। इन्हीं को पीएम आवास में बदल दिया गया है। बीडीए की डीपीआर को अभी तक शासन को मंजूरी नहीं मिली है। प्राइवेट पार्टनरशिप के बिना इतनी बड़ी संख्या में चयनित लाभार्थियों को किस तरह मकान उपलब्ध कराए जाएंगे, यह स्पष्ट नहीं है जबकि डूडा में ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन अब भी पहुंच रहे हैं। सरकारी सिस्टम के काम करने के तरीके से पीएम आवास के लिए चयनित लाभार्थियों को हाल-फिलहाल मकान मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे। 


 पीएम आवास योजना के नियम   
1- पहली कैटेगरी में वे आवेदक पात्र हैं, जिनके पास न जमीन है न अपना मकान। उनको एक कमरे का ईडब्ल्यूएस आवास 4.5 लाख रुपये में सरकार देगी। इसमें 2.5 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। दो लाख लाभार्थी को खुद देने होंगे। अगर लाभार्थी के पास इतनी रकम एक साथ चुकाने की क्षमता नहीं है तो वह अपनी आमदनी के आधार पर बैंक लोन लेकर इसे किस्तों में चुका सकता है। 
विज्ञापन

2- दूसरी कैटेगरी में तीन लाख रुपये तक की सालाना आमदनी वाले वह आवेदक शामिल हैं, जिनके पास अपनी जमीन है, लेकिन अपना मकान नहीं है। वह बैंक से लोन लेकर मकान बना सकते हैं। सरकार उसमें 2.5 लाख की सब्सिडी देगी। 
3- तीसरे कैटेगरी में 12 लाख रुपये की आमदनी वाले वह आवेदक लिए गए हैं, जिनके पास जमीन भी है और मकान भी, लेकिन उनका मकान जर्जर हो चुका है या फिर वह अपने मकान का विस्तार करना चाहते हैं। बैंक लोन लेकर वह मकान का विस्तार कर सकते हैं। सरकार 6.5 प्रतिशत से ऊपर बैंक ब्याज में छूट देगी। आवेदक को बैंक 6.5 प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध होगा। इससे ऊपर का बैंक ब्याज सरकार देगी। 
4- ग्रामीण क्षेत्र में जमीन होने पर सरकार चयनित लाभार्थी को 1.20 लाख रुपये उसके बैंक खाते में आवास निर्माण के लिए भेजेगी। उसे दो किस्तों में भेजा जाएगा। दूसरी किस्त तब मिलेगी, जब पहली किस्त का उपभोग हो जाएगा।  

कोट--
सरकार ने एक हेक्टेयर में 200 एलआईजी और एलआईसी बनाने की शर्त रखी है। सरकार की इन शर्तों पर कोई भी बिल्डर मकान नहीं बना पाएगा। सरकार अपनी शर्तों में कुछ तब्दीली करे तो क्रेडाई के लोग एलआईजी और ईडब्ल्यूएस मकान बनाने को तैयार हैं। -प्रिंस छाबड़ा, क्रेडाई सदस्य

कोट--
केंद्र सरकार ने 250 आवासों की कालोनी में एक तिहाई आवास ईडब्ल्यूएस बनाने की शर्त रखी थी। यूपी सरकार ने एक हेक्टेयर में 200 आवास बनाने की नई शर्त रख दी। उसमें प्लानिंग ही नहीं हो पा रही। हमने अपनी आपत्तियां सरकार को भेजी हैं। सरकार पॉलिसी बदलेगी तो हम मकान बनाएंगे।  रमनदीप सिंह, अध्यक्ष क्रेडाई 


कोट---
डूडा ने 1500 चयनित लाभार्थियों की सूची भेजी है लेकिन वह फाइनल नहीं है। अभी इसमें से और छंटनी होगी। बीडीए ने 254 आवास निर्माण की डीपीआर शासन को भेजी है। उसके मंजूर होते ही और सब्सिडी खाते में आते ही लाभार्थियों को ईब्ल्यूएस मकान दे दिए जाएंगे।  
विज्ञापन

- सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव बीडीए  े
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें