मीरगंज। नाहल नदी के पुनर्जीवन को लेकर प्रशासन की ओर से बनाई गई योजनाएं अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी हैं। उप जिलाधिकारी आलोक कुमार सिंह की तरफ से एक माह पहले सीमांकन के लिए गठित टीम आज तक सक्रिय नहीं हो पाई। न सीमांकन शुरू हुआ और न ही किसी प्रकार का सर्वे। लंबे समय से उपेक्षा की शिकार यह नदी अब पूरी तरह समाप्ति की कगार पर पहुंच चुकी है।
कभी मीरगंज क्षेत्र की प्रमुख जलधारा रही 56 किलोमीटर लंबी नाहल नदी लाभारी, कुल्छा, नौसना, खमरिया सानी सहित कई गांवों से बहकर पिलाखार नदी में मिलती थी, लेकिन आज नदी की तलहटी में झाड़ियां, कूड़ा, मिट्टी और अवैध कब्जों का फैलाव इतना बढ़ चुका है कि नदी की प्राकृतिक धारा लगभग समाप्त हो गई है। कई जगहों पर खेत बना दिए गए हैं, जिससे पानी का रास्ता पूरी तरह बंद है। स्थानीय ओपी शर्मा, पप्पू शर्मा, ओम प्रकाश, संजीव कुमार आदि का कहना है कि भूमि पूजन के बाद उम्मीद जगी थी कि जीर्णोद्धार कार्य शुरू होगा, लेकिन घोषणा के बाद से आज तक कोई वास्तविक कार्रवाई नहीं हुई। संवाद
30 नवंबर तक सभी कर्मचारी एसआईआर कार्य में व्यस्त हैं, इसलिए नाहल नदी का सीमांकन शुरू नहीं हो सका है। 30 नवंबर के बाद नाहल नदी पर सीमांकन का कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- आलोक कुमार सिंह, एसडीएम