मीरगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती का प्रसव कराने के बदले रुपये मांगने वाली आशा कार्यकर्ता, स्टाफ नर्स पर शुक्रवार को चिकित्सा अधीक्षक ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके विरोध में स्वास्थ्यकर्मियों ने ओपीडी बंद करके प्रदर्शन किया। इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। समझाने पर सभी काम पर लौटे।
नथपुरा निवासी उमेश चंद्र ने पत्नी अनीता को प्रसव पीड़ा होने पर 15 सितंबर को सीएचसी में भर्ती कराया था। आरोप है कि स्टाफ ने प्रसव के बदले पांच हजार रुपये ले लिए। 16 सितंबर को पीड़ित ने जिला पंचायत सदस्य निरंजन यदुवंशी को जानकारी दी। निरंजन के साथ कई भाजपाइयों सीएचसी पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया था। एसडीएम मीरगंज तृप्ति गुप्ता ने पीड़ित उमेश चंद्र से लिए रुपये वापस कराकर धरना समाप्त कराया था। इससे पूर्व भी एक धन उगाही का वीडियो वायरल हुआ था। प्रकरण में डीएम रविंद्र कुमार ने जांच के निर्देश दिए। सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. लईक अहमद अंसारी और डॉ. पवन कपाही को जांच सौंपी।
बृहस्पतिवार को दोनों जांच अधिकारी सीएचसी पहुंचे थे। डीएम को सौंपी जांच रिपोर्ट में आशा कार्यकर्ता रितु और स्टाफ नर्स निहारिका यादव को दोषी माना गया। डीएम के निर्देश पर शुक्रवार को चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनय कुमार पाल ने थाने में तहरीर दी थी। शनिवार को रिपोर्ट दर्ज हुई। संवाद