कूटरचित दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी करने के मामले में जेल भेजे गए चार दशक पुराने बिल्डर जगमोहन का एक जमाने में रियल एस्टेट कारोबार में एकछत्र राज था। आजकल के नामी बिल्डर तब जगमोहन के आसपास भी दिखाई नहीं देते थे। मगर वरिष्ठ आईएएस दीपक सिंघल से अनबन के बाद बिल्डर जगमोहन के दुर्दिन शुरू हो गए। अब उनकी बसाई कालोनियों में एक प्लाट को कई बार बेचने, सोसायटी के गठन में फर्जीबाड़ा करने, पार्क और मंदिर की जमीन को बेच देने और अपने रिश्तेदारों के नाम कर देने जैसे समेत तमाम मामलों का खुलासा हो रहा है। यहां तक कि उन पर गैंगेस्टर की कार्रवाई की संस्तुति तक हो चुकी है।
अपर आयुक्त आवास वीके मिश्र की ओर से 28 नवंबर 2017 को जारी आदेश में बताया गया कि दि आइडियल सहकारी आवास समिति के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संचालनकर्ता जगमोहन सिंह निवासी शिवनगर आईबीआरआई रोड, सचिव विपिन कुमार, संतोष कुमार और विनोद कुमार ने षड्यंत्र रचकर सोसायटी की करोड़ों की जमीन हड़पकर समिति के सदस्यों को बेघर कर दिया। समिति के सदस्यों का आरोप है कि बिल्डर जगमोहन ने पार्क की जमीन अवैध तरीके से कम कीमत पर अपने बेटे और रिश्तेदार के नाम विक्रय कर दी। स्वीकृत नक्शे में कूटरचना कर और अस्वीकृत नक्शों को स्वीकृत दिखाकर ग्राहकों को ठगा और उनके हाउसिंग लोन बैंक से स्वीकृत कराए। जांच अधिकारी ने इन आरोपों की पुष्टि भी की है। यही आरोप शंकर सहकारी आवास समिति डिफेंस पर्सनल सहकारी आवास समिति के सदस्यों ने लगाए हैं। सदस्यों का आरोप है कि बिल्डर जगमोहन ने सचिव से मिलकर सोसायटी की जमीन पर उनके लिए आवासीय योजना न विकसित कर व्यवसायिक काम के लिए केएन कंस्ट्रक्शन को बेच दी। सोसायटी की जमीन के इस हिस्से की कीमत करोड़ों में है, उसे अपने बेटे के नाम कर दिया। अपर आयुक्त आवास की जांच में इन आरोपों की पुष्टि होने के बाद सोसायटी के पदाधिकारियों को हटाने के निर्देश भी जारी किए गए थे।
कोट--
बिल्डर जगमोहन पर दो मुकदमे पहले से चार्जशीटेड हैं। एक मामले में पुलिस ने जेल भेज रखा है। अन्य मामलों की जांच भी उन पर चल रही है। जगमोहन पर गैंगेस्टर की कार्रवाई प्रक्रिया में चल रही है। रोहित सिंह सजवाण, एसपी सिटी