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मौतों की रिपोर्टिंग पर भी खड़ा हुआ सवाल

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बरेली। अप्रैल और मई के महीने में श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए लंबी कतारें लगी रहने के बावजूद जिले के सरकारी रिकॉर्ड में किस तरह कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा सौ के ऊपर भी नहीं पहुंच पाया, इसकी परतें अब खुलने लगी हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में इस बीच होम आइसोलेशन में रहे 20 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमितों में से एक की भी मौत दर्ज नहीं है।
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अप्रैल की शुरुआत से जब कोरोना की दूसरी लहर का कहर टूटना शुरू हुआ तो शहर के तमाम अस्पतालों में बेड मिल पाना नामुमकिन की हद तक पहुंच गया। मजबूरी में तमाम गंभीर मरीजों को भी होम आइसोलेशन में रहना पड़ा। जिला प्रशासन की ओर से नियंत्रित होने वाले इंटिग्रेटेड कोविड कंट्रोल सेंटर की मानीटरिंग रिपोर्ट बताती है कि 20 हजार से ज्यादा संक्रमितों ने होम आइसोलेशन का विकल्प चुना। तय व्यवस्था के मुताबिक इन संक्रमितों की निगरानी आरआरटी यानी रैपिड रिस्पॉन्स टीम को करनी थी। आरआरटी को निर्देश था कि इन संक्रमितों का नियमित रूप से फॉलोअप लिया जाए और अगर उनकी हालत खराब होती है तो उन्हें उचित इलाज मुहैया कराया जाए।
जिले में यह फॉलोअप किस तरह हुआ, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंटिग्रेटेड कोविड कंट्रोल सेंटर की मॉनिटरिंग रिपोर्ट में होम आइसोलेट हुए 20 हजार से ज्यादा संक्रमितों में से एक की भी मौत होना दर्ज नहीं है। बता दें कि जिले से नियमित रूप से कोरोना से होने वाली मौतों का रिकॉर्ड शासन तक भेजा जाता है लेकिन होम आइसोलेशन में संक्रमितों की मौत के कॉलम में लगातार शून्य देखने के बावजूद न जिले के किसी अधिकारी ने इस पर सवाल खड़ा किया न शासन ने।
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मौतों के रिकॉर्ड पर सवाल खड़े होने
के बाद अब जांच कराने का फैसला
जिन कोरोना संक्रमितों को गंभीर हालत होने के बाद भी अस्पतालों में बेड नहीं मिल पाए, उनमें तमाम बुजुर्ग और दूसरी गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोग भी थे। अप्रैल और मई में शहर के श्मशान घाटों पर जो नजारे दिखे, उनसे यह भी जाहिर है कि जिंदगी के लिए जूझ रहे लोगों को ये हालात किस कदर भारी पड़े। जिस वक्त स्वास्थ्य विभाग का रिकॉर्ड पूरे जिले में कोरोना से बमुश्किल सौ मौतें होने की बात कह रहा है, ऐन उसी वक्त नगर निगम का रिकॉर्ड बता रहा है कि अप्रैल और मई सिर्फ शहर में ही तीन हजार से ज्यादा मौतें हो गईं जो पिछले साल के मुकाबले पांच गुना से भी ज्यादा थीं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के दावों पर सवाल खड़े होने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के अफसर आशंका जता रहे हैं कि रैपिड रिस्पांस टीम से कोरोना संक्रमितों का फॉलोअप करने में चूक हुई है। लिहाजा अब होम आइसोलेशन में रहे संक्रमितों का नए सिरे से फॉलोअप करने का निर्देश दिया गया है।
सीएम ने माना था कोविड कंट्रोल सेंटर
को सबसे महत्वपूर्ण फिर भी लापरवाही
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना के दौर में दो बार बरेली का दौरा किया है और दोनों बार वह कलक्ट्रेट में स्थापित इंटिग्रेटेड कोविड कंट्रोल सेंटर का मुआयना करने पहुंचे थे। इस बार आठ मई को वह जब बरेली आए तो सबसे पहले कोविड कंट्रोल सेंटर ही पहुंचे और उसकी पूरी कार्यप्रणाली समझने के बाद वहां तैनात स्टाफ का काम सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए उसे पूरी जिम्मेदारी के साथ करने का निर्देश दिया था लेकिन अब कोविड कंट्रोल सेंटर में ही सबसे ज्यादा लापरवाही होने पर सवाल उठ रहा है।
प्राइवेट कोविड अस्पतालों में हुई मौतों पर
भी उठ चुके हैं सवाल पर जांच पूरी नहीं
कोरोना से होने वाली मौतों को सरकारी रिकॉर्ड में कम दर्शाना बहुत ज्यादा अस्वाभाविक नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि बरेली में यह अंतर बहुत बड़ा है। प्रकारांतर से स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी इसे स्वीकार कर रहे हैं। पिछले दिनों प्राइवेट कोविड अस्पतालों में भी कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े कम दर्शाए जाने का मामला शासन के डेथ ऑडिट में ही पकड़े जाने की बात कही गई थी जिसके बाद इन अस्पतालों से ऐसी मौतों की जानकारी देने को कहा गया था। हालांकि इसके बाद भी सिर्फ एक ही अस्पताल की ओर से छह कोरोना संक्रमितों की मौत को अपडेट किया गया। ये सभी छह मौत करीब सवा महीने पहले यानी अप्रैल में होनी बताई गई थीं जिससे जाहिर हो गया कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और प्राइवेट अस्पताल दोनों ने भारी लापरवाही की गई।
होम आइसोलेशन पर रहे मरीज स्वस्थ हो गए या उनकी मौत हुई, कंट्रोल सेंटर को इसकी पड़ताल के निर्देश दिए हैं। अगर होम आइसोलेशन में किसी मौत की जानकारी मिली तो उसे पोर्टल पर अपडेट करेंगे। लोगों से अपील है अगर उनके किसी संक्रमित परिजन की मौत होम आइसोलेशन में हुई है तो उसकी जानकारी कंट्रोल सेंटर को दें। - डॉ. रंजन गौतम, एसीएमओ/जिला सर्विलांस अधिकारी
होम आइसोलेशन और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की रिपोर्ट इंटिग्रेटेड कोविड कंट्रोल कमांड सेंटर में आती है। वहां जो जानकारी दर्ज है, वह सही होगी। - नितीश कुमार, डीएम
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