सीबीगंज। नंदोसी स्थित नगर निगम की कान्हा उपवन गोशाला में सात गोवंशीय पशुओं की मौत के मामले को लेकर शनिवार को हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं व गो रक्षकों ने जमकर हंगामा किया। पशुओं के शवों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोक लिया। सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम के कई अधिकारी मौके पर पहुंच गए। तीन घंटे तक चले हंगामा चला। शवों का पोस्टमार्टम कराने व रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के आश्वासन पर प्रदर्शनकारी शांत हुए।
गोवंशीय पशुओं की मौत की सूचना पर राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष रोहित गंगवार, अमित गंगवार, विजय मौर्य, चंद्रेश, हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष हिमांशु पटेल, निर्दोष राठौर, अरुण फौजी व राष्ट्रीय गो रक्षा संघ के वीरेंद्र, सोनू ठाकुर समेत कई कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। पोस्टमाॅर्टम के लिए पशुओं के शवों को ले जा रही ट्रॉली को रोककर विरोध शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने गोशाला में घुसने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि कर्मचारियों ने गेट नहीं खोला।
रोहित गंगवार ने आरोप लगाया कि गोशाला में भूख व प्यास के कारण रोजाना गोवंशीय पशुओं की मौत हो रही है। दावा किया कि शनिवार सुबह भी दर्जनभर से अधिक पशुओं को खेत में दफनाया गया। उन्होंने पर्याप्त चारा नहीं दिए जाने और बीमार पशुओं के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। कहा कि पोस्टमाॅर्टम सिर्फ 10 पशुओं का कराया गया।
हंगामे की सूचना पर नगर मजिस्ट्रेट राजेश वर्मा, सीओ द्वितीय नितिन कुमार, अपर नगर आयुक्त शशि भूषण राय, पशु कल्याण अधिकारी डाॅ. हरपाल सिंह भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया तो गतिरोध समाप्त हुआ। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि भूख से मौत की पुष्टि हुई तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
चिकित्सक का किया विरोध
पोस्टमाॅर्टम के लिए डाॅ. हीरालाल, डाॅ. राजेश, डाॅ. राजीव सिंह, डाॅ. सुनैना को भेजा गया। इस दौरान गोरक्षकों ने विरोध कर दिया। उनका कहना था कि स्थानीय पशु चिकित्साधिकारी से पोस्टमॉर्टम न कराया जाए। समझाने के बाद लोग शांत हुए।
पॉलिथीन खाने से सात पशुओं की मौत का दावा
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. मनमोहन पांडेय ने बताया कि 28, 29 अगस्त को सीबीगंज क्षेत्र में सड़क किनारे गोवंशीय पशु बीमार पड़े थे। सात बीमार पशुओं को कान्हा उपवन लाया गया था। वहां उनकी मौत हो गई। सोमवार सुबह शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया तो उनके पेट पॉलिथीन मिली। चारे का पाचन नहीं होने के कारण पशुओं की मौत की पुष्टि हुई है। लोग घरेलू कचरे को पॉलिथीन में करके फेंक रहे हैं। नगर निगम की तरफ से ठीक से सफाई भी नहीं कराई जा रही है। चारे की तलाश पशु पॉलिथीन भी खा जाते हैं। यह उनकी मौत का कारण बन रहा है।