आर्य समाज अनाथालय में वर्तमान में पंद्रह लड़कियां हैं। दान दाताओं के सहयोग से 10 लड़कियां गुरुकुल विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करके अपना जीवन संवार रही हैं। कई लड़कियां तो पढ़ने में बहुत अच्छी हैं। डोली ने भी हाईस्कूूल की परीक्षा 63 फीसदी अंक पाकर पास की है। बड़ी लड़कियों का कहना है कि अनाथालय में माता-पिता के सिवा कुछ नहीं है। छोटी बच्चियों को वह अपने-भाई बहन की तरह पढ़ाती हैं।
तीन मासूमों को अनाथालय में छोड़ गया ताऊ
बरेली। रिठौरा के पास रेडी चट्टा गांव के तीन मासूम भाई-बहनों को उनका ताऊ रामपाल ही आर्य समाज अनाथालय में छोड़ गया। अप्रैल 2016 में इन बच्चों की मां सुनीता की प्रसव के दौरान मौत हो गई थी। मार्च, 2017 में पिता रामबाबू भी बच्चों का साथ छोड़कर चल बसे। पड़ोस के गांव पडौली में रहने वाले शिक्षक रामविलास ने बताया कि मासूम दीक्षा, राहुल और विकास को माता-पिता की मौत के बाद कुछ दिन तक तो उनके ताऊ ने पाला-पोसा लेकिन जब वह खर्च उठाने मेें असमर्थ हो गए तो तीनों को अनाथालय में दाखिल करा गए।
कोमल को नाना ही छोड़ गए
बरेली।
करगैना रोड पर रहने वाले दाताराम शर्मा दो महीने पहले 8 वर्षीय मासूम कोमल को आर्य समाज अनाथालय में छोड़ गए। बनखंडी नाथ मंदिर के पास कोमल के माता-पिता रहते थे। मां की पहले ही मौत हो चुकी थी। बाद में पिता का भी मौत हो गई। बुजुर्ग नाना उसे पालने की स्थिति में नहीं थे। उसका दाखिला तक नहीं करा पा रहे थे। इसलिए वह उसे अनाथालय में छोड़ गए। यहां कोमल मस्त है और पढ़ाई भी कर रही है।