आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की ओर से अयोध्या विवाद में समझौते के फार्मूले के तौर पर पेश किए गए राम मंदिर से कुछ दूरी पर बाबरी मस्जिद का निर्माण कराने के सुझाव पर दरगाह आला हजरत को एतराज है। मंगलवार को बरेली पहुंचे श्री श्री के कार्यक्रम से दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां समेत दूसरे जिम्मेदारान के दूरी बनाए रखने के पीछे भी यही वजह बताई जा रही है।
अमर उजाला की ओर से बुधवार को भी इस संबंध में दरगाह प्रमुख का रुख जानने की कोशिश की गई। उनका तो अधिकृत बयान नहीं मिला, लेकिन दरगाह के प्रवक्ता मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी ने जरूर स्थिति साफ की। श्री श्री रविशंकर के दरगाह आने पर कोई टिप्पणी करने से इन्कार करते हुए मुफ्ती सलीम नूरी ने श्री श्री के तीन बयानों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि श्री श्री अयोध्या में मस्जिद को शिफ्ट करने की बात कह रहे हैं, वह गलत है। इस्लाम में मस्जिद को शिफ्ट करने की इजाजत नहीं है। यदि कहीं ऐसा हुआ है तो वह गलत है। अगर मस्जिद शिफ्ट भी हुई है तो फिर उसकी जगह कोई दूसरा धार्मिक स्थल नहीं बनाया गया।
मुफ्ती सलीम नूरी ने श्री श्री के कुरआन का हवाला देकर यह कहने पर भी आपत्ति जताई कि विवादित जगह पर मस्जिद नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि यह गलत है और इससे लोग गुमराह हो रहे हैं। कुरआन में कहीं भी ऐसा जिक्र नहीं है। बल्कि यह तो कुरआन पर आरोप है। कुरआन हदीस में जो बात न हो उस पर यह कहना कि ऐसा कुरआन और हदीस में है, इसे इस्लाम में गुनाह माना जाता है। श्री श्री से गुजारिश है कि वह इस मसले में बिना दरियाफ्त किए कुरआन का हवाला न दें।
दरगाह के प्रवक्ता ने अल्लाह को रामलला के रूप में विराजमान होने संबंधी श्री श्री के बयान पर भी एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि यह बात इस्लामी विचारधारा के विपरीत है। इस्लाम की विचारधारा यह है कि अल्लाह किसी जगह, किसी रूप में विराजमान नहीं हो सकता। ऐसा कहना भी इस्लाम में गुनाह है। क्योंकि अल्लाह किसी भी जगह विराजमान होने या किसी के रूप में आने से पाक है। उनके ऐसा कहने से मुस्लिमों की आस्था को चोट पहुंच रही है।