बरेली। शहर की सड़कों पर टूटे और खुले मैनहोल जानलेवा साबित हो रहे हैं। नगर निगम की लापरवाही से आए दिन हादसे हो रहे हैं। प्रत्येक दस मीटर पर एक खतरनाक मैनहोल देखा जा सकता है। खराब गुणवत्ता के कारण सीवर लाइन के ढक्कन टूटकर सड़क में धंस रहे हैं।
नगर निगम का जलकल विभाग इनकी मरम्मत नहीं करा रहा है। विभाग ने वित्त वर्ष 2024-25 में 6.74 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 11 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इसके लिए विभिन्न प्रकार के मैनहोल फ्रेम और कवर खरीदे जा रहे हैं। हालांकि, गुणवत्ता खराब होने के चलते ये ढक्कन आए दिन टूट रहे हैं।
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केस वन :- श्यामगंज चौराहे से विकास भवन के लिए जाने वाले मार्ग पर सीवर लाइन का ढक्कन धंस गया है। यह करीब एक फुट अंदर तक धंसा है। इसी टूटे हुए ढक्कन से 10 मीटर आगे एक और ढक्कन टूटा हुआ है। यह दोनों ही ढक्कन जानलेवा हो गए हैं।
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केस टू :- सिविल लाइंस से गोदाम वाली में तीन मैनहोल का ढक्कन धंसा हुआ है। जिससे अचानक सामने आने पर कोई वाहन चालक असंतुलित हो जाता है। यहां दो से तीन मैनहोल हैं जिसकी दूरी करीब 10-10 मीटर होगी।
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केस थ्री :-इसाइयों की पुलिया से गांधी उद्यान तक दो से तीन मैनहोल के ढक्कन धंसे हैं। इससे लोगों को आवागमन में समस्या हो रही है। इसके बाद भी संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
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केस फोर :- धर्मकांटे से प्रेमनगर थाना मार्ग पर भी तीन मैनहोल के ढक्कन धंस गए हैं। यह बहुत ही खतरनाक है। दो पहिया व चार पहिया वाले वाहन गुजरने पर धड़ाम से आवाज होती है। इससे लोगों में हादसे का डर बना हुआ है।
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वर्जन ...
जिन सीवर लाइन के ढक्कन टूटने की शिकायतें मिलती हैं। उनकी मरम्मत कराई जाती है। शहर में पुन: टूटे सीवर के ढक्कन को चिह्नित कर मरम्मत कराई जाएगी। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त, नगर निगम