फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खतरनाक खेल.. इधर जिंदगी दांव पर.. उधर ट्रूनेट जांच में हेरफेर

विज्ञापन
corona in india - फोटो : demo photo
विज्ञापन

जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच न करने पर डॉक्टर भी भन्नाए, ट्रूनेट स्टाफ से नोकझोंक
विज्ञापन

महिला अस्पताल की सीएमएस ने गर्भवती महिलाओं की जांच न होने पर सीएमओ को लिखा पत्र
मरीजों का आरोप- पीछे के दरवाजे से लोगों को सीधे बुलाकर ले लिए जाते हैं सैंपल

बरेली। एक तो कोरोना तमाम लोगों की जिंदगियों के लिए खतरा बना हुआ है, दूसरी तरफ जिला अस्पताल का स्टाफ उनके साथ खिलवाड़ करने में कसर नहीं छोड़ रहा है। अब ट्रूनेट जांच में मनमानी से जिला अस्पताल का माहौल गर्म हो रहा है। आम मरीजों का तो खुला आरोप है ही कि ट्रूनेट जांच में जिला अस्पताल का स्टाफ कमीशनखोरी कर रहा है, जिला अस्पताल के डॉक्टर भी रेफर किए गए मरीजों की जांच न किए जाने से भन्नाए हुए हैं। महिला अस्पताल की सीएमएस ने गर्भवती महिलाओं की समय से जांच न किए जाने पर सीएमओ को पत्र लिखा है। यह भी आगाह किया है कि जांच करने में यह मनमानी तमाम जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है।
ट्रूनेट मशीन पर कोरोना संदिग्ध मरीजों की जांच में मनमानी की शिकायतें वैसे तो कई दिन पहले से हो रही थीं मगर शनिवार को जिला अस्पताल के ही डॉक्टरों की ओर से रेफर किए गए सात मरीजों के सैंपल की भी जांच न किए जाने पर यह मामला तूल पकड़ गया। डॉक्टरों के मुताबिक महेश कुमार, रामभरोसे, देवेंद्र पाठक, ब्रजेश, रामअवतार, शिवदर्शन समेत सातों मरीज जिला अस्पताल में ही भर्ती हुए हैं। सातों मरीजों में कोरोना जैसे लक्षण होने के कारण डॉक्टर ने इलाज शुरू करने से पहले उनके सैंपल की जांच के लिए लिखा जिसके बाद शनिवार शाम तक उनके सैंपल तो ले लिए गए मगर रिपोर्ट एक भी मरीज की नहीं दी गई। रविवार दोपहर जब डॉक्टर ने रिपोर्ट मांगी तो ट्रूनेट मशीन के स्टाफ ने जांच से ही इनकार कर दिया। इस पर डॉक्टर और ट्रूनेट मशीन के स्टाफ में जमकर कहासुनी भी हुई।
विज्ञापन

डॉक्टरों ने इसके बाद अपने स्तर से ही छानबीन की तो पता चला कि शनिवार से रविवार के बीच 21 सैंपल की ट्रूनेट मशीन पर जांच की गई। इनमें से कुछ ही सैंपल जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के थे। ज्यादातर जांच उन लोगों की हुई जो बाहर के थे और उन्होंने अपनी जांच के लिए सीधे ट्रूनेट मशीन पर लगे स्टाफ से संपर्क किया था। यह स्थिति तब है जब ट्रूनेट मशीन पर अस्पताल में भर्ती मरीजों के सैंपलों की जांच प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिए गए हैं।

गर्भवती महिलाओं के सैंपलों की भी जांच नहीं, बदसलूकी का आरोप

जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ ट्रूनेट मशीन का स्टाफ गर्भवती महिलाओं के सैंपलों की जांच भी समय से न करने पर कटघरे में है। महिला अस्पताल प्रशासन का तो यहां तक कहना है कि उनका स्टाफ जब सैंपल लेकर पहुंचता है तो ट्रूनेट मशीन का स्टाफ उन्हें अभद्र व्यवहार करके लौटा देता है। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने बताया की गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन से पहले सैंपल की तत्काल जांच करानी जरूरी है क्योंकि इसमें देरी से उनकी जान पर बन सकती है। लेकिन जब उनके सैंपल जांच के लिए भेजे जाते हैं तो ट्रूनेट का स्टाफ बदसलूकी करता है। सुबह भेजे गए सैंपलों की रिपोर्ट रात या फिर अगले दिन दी जाती है। ऐसे हालात में किसी भी दिन कोई बड़ी अप्रिय घटना हो सकती है।

पांच घंटे कराया इंतजार फिर भी नहीं लिए सैंपल तो हुआ हंगामा

बालाजी विहार का एक युवक जिसके परिवार के तीन सदस्य पहले ही संक्रमित मिल चुके हैं, शनिवार को वह ट्रूनेट से जांच कराने पहुंचा तो स्टाफ ने उसे पहले पांच घंटे तक लाइन में खड़ा रखा और फिर जब उसका नंबर आया तो जांच करने से ही इनकार कर दिया। युवक के मुताबिक इसी दौरान ऑटो से पहुंचे दो लोगों को पीछे के रास्ते से अंदर बुलाकर उनके सैंपल ले लिए गए। युवक का आरोप है कि सैंपल की जांच के लिए स्टाफ कमीशन मांगता है। शनिवार को सैंपल कराने आए और लोगों ने भी यही आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया तो स्टाफ ने दरवाजा बंद कर चुपचाप अंदर बुलाए गए लोगों को बाहर निकाल दिया।

ट्रूनेट मशीन पर भेजे गए सैंपल की जांच करने में स्टाफ लापरवाही दिखाता है। सुबह से भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट शाम या अगले दिन तक दी जाती है। इससे किसी भी दिन किसी गर्भवती महिला के साथ कोई अनहोनी हो सकती है। इस मामले में सीएमओ को पत्र लिखा गया है। - डॉ. अलका शर्मा, सीएमएस महिला अस्पताल

कोरोना से दहले शहर में खतरे और भी हैं.. 

बरेली। जिले में सक्रिय संक्रमितों की तादाद सात सौ तक जा पहुंचने के अलावा 50 से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है और इसके साथ हर दिन करीब 50 लोगों में संक्रमण की पुष्टि होने से साफ है कि शहर में अब सामुदायिक संक्रमण की स्थिति है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर अब भी इसे नकारने के साथ हालात को काबू में बता रहे हैं। दूसरी ओर तमाम ऐसे खतरे सामने हैं जो आने वाले दिनों में स्थिति और खराब होने की ओर इशारा कर रहे हैं लेकिन इन्हें भी अनदेखा किया जा रहा है।
विज्ञापन

खुद स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट बताती है कि सात दिन पहले तक जिले में सक्रिय संक्रमितों की संख्या 406 थी जो अब 730 पर पहुंच गई है। जिले में अब तक 12 सौ पॉजिटिव केस मिल चुके हैं। दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहे संक्रमण पर अफसर खामोश हैं, दूसरी ओर विशेषज्ञ आने वाले दिनों में हालात गंभीर होने का अंदेशा जता रहे हैं। उनका मानना है कि बगैर लक्षण वाले मरीजों के तो स्वस्थ होने की संभावना है लेकिन जो लोग पहले से गंभीर रूप से बीमार हैं या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, उन्हें अगर संक्रमण हुआ तो जानलेवा होगा और ऐसी स्थिति में मौतों की संख्या एकाएक काफी बढ़ जाएगी।

खतरा- 1 हफ्ते भर बाद भी नहीं बना कंटेन्मेंट जोन

रोहलीटोला, सिंधुनगर, आजादनगर, पुराना शहर आदि कई इलाके ऐसे हैं जहां पिछले सात दिनों में कई संक्रमित मिल चुके हैं मगर इन इलाकों में अब तक हॉटस्पॉट नहीं बनाया गया है। रोहलीटोला में एक ही परिवार के पांच लोगों में संक्रमण की पुष्टि के बाद भी इस इलाके को हॉटस्पॉट बनाने में प्रशासन और पुलिस ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। प्रशासन की इस लापरवाही से लोगों में गुस्सा भी है।

खतरा- 2 कंटेनमेंट जोन में अब सर्वे भी किया बंद

नियमों के मुताबिक संक्रमण की पुष्टि होने पर इलाके को कंटेनमेंट जोन घोषित कर वहां घर-घर सर्वे कराया जाना चाहिए लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस काम से भी हाथ खींच लिए हैं। कहा जा रहा है कि कंटेनमेंट जोन में सर्वे के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास टीमें ही नहीं हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिले में अब तक दो सौ से ज्यादा हॉटस्पॉट बन चुके हैं लेकिन ज्यादातर हॉटस्पॉट में कागजों पर ही स्क्रीनिंग हो रही है।

खतरा- 3 सैंपल लक्ष्य से ज्यादा मगर जांच करने में पस्त

पिछले दिनों सैंपलिंग में पिछड़े बरेली में नई टीम गठित होने के बाद हर दिन करीब आठ सौ 12 सौ सैंपल लिए जा रहे हैं। मगर अब पेच सैंपल की जांच को लेकर फंस गया है। आईवीआरआई ने एक दिन में छह सौ से ज्यादा सैंपल की जांच करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं, जिला अस्पताल की आरटीपीसीआर लैब में अब तक जांच शुरू नहीं हो सकी है। इसकी वजह से सैंपल की रिपोर्ट आने में चार से पांच दिन का वक्त लग रहा है।

खतरा-4 संक्रमित के संपर्क में आए बगैर हो रहे संक्रमित

आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक अगर संक्रमित व्यक्ति में पांच दिन बाद भी संक्रमण का स्रोत न मिले तो इसे सामुदायिक संक्रमण की शुरूआत माना जा सकता है। जिले के रिपोर्ट कार्ड पर गौर करें तो अब तक करीब ढाई सौ से ज्यादा ऐसे संक्रमित मिल चुके हैं जिनमें संक्रमण के स्रोत का पता नहीं लगाया जा सका। फिर भी अफसर इसे सामुदायिक संक्रमण मानने को तैयार नहीं हैं। अफसरों की यह खामोशी ही जिले में संक्रमण को बढ़ावा देने की वजह मानी जा रही है।

सीमित संसाधनों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। संक्रमित के संपर्क में आए बगैर कोई भी संक्रमित नहीं हो सकता। वास्तव में लोग सही जानकारी ही नहीं दे रहे हैं। पता और फोन नंबर भी गलत दर्ज करा रहे हैं। लोग संक्रमण से बचाव के लिए नियम-कायदों का पालन करें। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें