अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों की आरटीपीसीआर जांच बेहद जरूरी
बरेली। बर्ड फ्लू के चलते आईवीआरआई में आरटीपीसीआर जांच बंद कर दी गई है। जिला अस्पताल और लखनऊ भेजकर सैंपल की जांच कराई जा रही है, जिससे रिपोर्ट मिलने में सौ घंटे से भी ज्यादा का वक्त लग रहा है। चिकित्सकों को आशंका है कि जांच रिपोर्ट में देरी अस्पतालों में भर्ती मरीज और संक्रमितों पर भारी न पड़ जाए। उन्होंने इसमें जल्द सुधार का सुझाव दिया है।
करीब दस दिन पहले शासन ने बर्ड फ्लू के चलते आईवीआरआई में कोरोना सैंपल की जांच बंद कराने का आदेश प्रशासन को दिया था। प्रशासन ने सीएमओ को सैंपल लखनऊ राम मनोहर लोहिया अस्पताल भेजने को कहा था। जांच रिपोर्ट मिलने में सौ घंटे से भी ज्यादा का समय लगने की वजह से नवागत सीएमओ ने आईवीआरआई में लगे ऑटोमेटिक आरएनए डिस्ट्रैैक्टर और अन्य संबंधित उपकरणों को जिला अस्पताल की बीएसएल-2 लैब में स्थापित कराने का कार्य शुरू कराया। करीब 15 सौ सैंपल की जांच करने के लिए सभी जरूरी उपकरण बीएसएल-2 (बायो सैफ्टी लैब) में लगा दिए। करीब चार दिन पहले उपकरण लगा दिए गए मगर अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही है। अफसरों का कहना है कि ऑटोमेटिक उपकरणों के संचालन के लिए जो स्टाफ हैं वह पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं है और 24 घंटे लैब संचालन के लिए आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट में कार्य करने के लिए भी स्टाफ की कमी है। इस वजह से लैब में जांच को भेजे जा रहे सभी सैंपल की रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है।
दावा: सात सौ सैंपल की ही हो रही जांच
बीएसएल-2 लैब में जिले भर से लिए गए करीब 15-16 सौ सैंपल आरटीपीसीआर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। अफसरों का दावा है कि हर दिन करीब छह से सात सौ सैंपल की जांच हो रही है मगर हकीकत इससे इतर है। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि लैब में जांच की तादाद उपकरण लगने के बाद बढ़ी जरूर है मगर यह सिर्फ तीन से चार सौ तक ही सीमित है। करीब चार गुना सैंपल की जांच हो नहीं हो पा रही है।
होम आइसोलेशन की अवधि पूरी मगर रिपोर्ट के इंतजार में आइसोलेट हैं लोग
शासन की गाइडलाइन के अनुसार एंटीजन, आरटीपीसीआर, ट्रूनेट किसी भी विधि से हुई सैंपल की जांच में कोविड-19 संक्रमित मिलने पर दस दिन तक होम आइसोलेशन में रहना जरूरी है। दस दिन की अवधि पूरी होने पर एंटीजन जांच अमान्य है, सिर्फ आरटीपीसीआर जांच जरूरी है। वे लोग जो संक्रमित हैं और समय सीमा पूरी होने पर जांच करा रहे हैं, उन्हें रिपोर्ट मिलने तक आइसोलेट किया जा रहा है। जिसे लेकर तीन सौ बेड अस्पताल स्थित फ्लू कॉर्नर पर एंटीजन जांच कराने की मांग हो रही है। आरटीपीसीआर जांच ही करने के आदेश पर अब लोग नोंकझोंक करने पर आमादा हो रहे हैं।
आरटीपीसीआर जांच सौ फीसदी सही
वायरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक, संक्रमण की पुष्टि किसी भी जांच विधि से हो मगर निगेटिव सिर्फ आरटीपीसीआर जांच कराने के बाद ही कहा जा सकता है। बताया कि आरटीपीसीआर जांच सौ फीसदी सही होती है। एंटीजन की निगेटिव रिपोर्ट 70 फीसदी तक मान्य है। ऐसे में एंटीजन की जांच में निगेटिव रिपोर्ट पूरी तरह सटीक नहीं कही जा सकी। इसलिए आरटीपीसीआर जांच जरूरी है।
मरीजों की रिपोर्ट मिलने में भी देरी
नियमानुसार अस्पताल पहुंच रहे गंभीर मरीज को भी बगैर एंटीजन जांच किए और आरटीपीसीआर का सैंपल लिए बिना इलाज शुरू नहीं किया जा सकता है। ऐसे में वह गंभीर मरीज जिन्हें ऑपरेशन कराना है या मुंह संबंधी बीमारी है उनकी आरटीपीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट के बगैर इलाज करने में खतरा है। इसलिए रिपोर्ट के इंतजार में मरीज और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
‘संक्रमित मिलने के बाद होम आइसोलेशन की समय सीमा पूरी होने पर आरटीपीसीआर जांच ही वैध है। जिला अस्पताल की लैब में उपकरण लग चुके हैं और जांच की तादाद भी बढ़ी है। अभी प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है, इसलिए शत प्रतिशत जांच रिपोर्ट 24 घंटे में नहीं मिल रही है। स्टाफ की कमी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि लोगों की परेशानी दूर हो सके।’ - डॉ. सुधीर गर्ग, सीएमओ