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मिथिलेश्वर की कहानी को बयां करता है ‘बाबू जी’ नाटक

Fri, 24 Jan 2020 01:57 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क,
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थिएटर फेस्ट की पांचवीं शाम को फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ने अपनी मौजूदगी से यादगार बना दिया। उनके समक्ष दिल्ली की संस्था फ्लाइंग आर्ट एसोसिएशन ने ‘बाबू जी’ नाटक की शानदार प्रस्तुति दी। मिथलेश्वर की कहानी पर आधारित ‘बाबू जी’ नौटंकी शैली का नाटक है। दरअसल यह नाटक संगीत के रसिया बाबू जी यानी लल्लन सिंह की जिंदगी की कहानी को बयान करता है। जिनकी हर संभावना, हर आकांक्षा.. यहां तक कि हर सुख दुख और तमाम परेशानियां व खुशियां सिर्फ संगीत है।

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बाबू जी की कोशिश रहती है कि अपने सामाजिक दायित्वों के साथ अपने अंदर के कलाकार को भी बचाए रखे, लेकिन नौटंकी के प्रति उनका लगाव उनके परिवार को तबाह कर देता है। यहां तक कि उनकी पत्नी बेटा, और समाज के लोग उनका साथ देने के बजाए उन्हें घर के बाहर कर देते हैं। हालांकि इससे उनके संगीत पर असर नहीं पड़ता और आखिरी सांस तक संगीत के लिए उनकी आसक्ति बची रहती है। परोक्ष में यह नाटक एक कलाकार के जीवन और उसके संघर्ष की छवि भी प्रस्तुत करता है। इस नाटक का हिंदी रुपांतरण विभांशु वैभव ने किया है। सशक्त निर्देशन राजेश सिंह का रहा।

टक में इस्तेमाल संगीत बी वी कारंत की रचना है। यूं तो इसमें कलाकारों ने सधा हुआ अभिनय किया, मगर बाबू जी और नृतकी की भूमिका निभाने वाले पात्रों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी। लाईट सेट और वेषभूषा भी पात्रों के अनुरूप रही। इस मौके पर अभिनेता राजपाल यादव ने कहा कि वह एक एकल नाटक ‘रावण’ तैयार कर रहे हैं। डा. ब्रिजेश्वर सिंह ने राजपाल यादव का स्वागत किया और राजपाल ने नाटक के निर्देशक को स्मृति और शाल के साथ सम्मानित किया। संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह ने किया। इस दौरान डा. गरिमा सिंह, राजा चावला, शिखा सिंह, चरण कमलजीत सिंह, संजीव अग्रवाल, नवीन कालरा, डा. शालिनी अरोड़ा आदि मौजूद रहे। संवाद

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