बरेली। थिएटर फेस्ट में नाटक मंचन से पहले लोकगीत की गूंज ने समा बांध दिया। इसमें गौटिया राजपुर (आंवला) के कलाकारों ने रुहेलखंड संस्कृति पर आधारित स्थानीय भाषा में भजन-कीर्तन के अलावा रागनी पेश कर दर्शकों का मन मोह लिया।
विंडरमेयर के ऑडिटोरियम से हटकर मुख्य गेट के पास बने प्लेटफार्म पर शाम को रुहेलखंड कीर्तन पार्टी के आशा राम और विजयवीर ने अपने साथी कलाकारों के साथ भजन-कीर्तन के बाद जब आल्हा की तर्ज पर रागनी के गीत छेड़े तो दर्शक झूम उठे। हारमोनियम तबले के साथ चिमटा और खंजरी धुन ने गायकी को और भी सुहाना बना दिया। टीम के संयोजक किशन पाल सिंह ने बताया कि इन दिनों माघ माह में हम कलाकार भोर में चार बजे उठकर गांव में फेरी लगाते हुए साज के साथ गीत गाते हैं। इसमें करीब दो से ढाई घंटे लगते हैं। क्योंकि यह महीना धार्मिक आस्था के एतवार से महत्वपूर्ण होता है। मान्यता है कि इस माह में भोर के समय गीत गाने से पुण्य मिलता है और यह यहां की परंपरा भी है।