- जनप्रतिनिधियों और अफसरों की अनदेखी से नहीं बन पा रही बरेली पर्यटन नगरी
बरेली। पहाड़ का प्रवेश द्वार बरेली कई ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजे है। महाभारत काल, जैन, बौद्ध, मुगल और रुहेला शासन काल की तमाम समृद्धशाली स्मृतियों को संजोए बरेली अब तक हृदय (हेरिटेज सिटी डेवपलमेंट एंड ऑग्मेंटेशन) योजना में जगह नहीं बना सकी है। वक्त के साथ यहां की ऐतिहासिक धरोहर कहीं जमींदोज तो कहीं खंडहर में तब्दील हो रही हैं। इनकी मरम्मत और रखरखाव के लिए कोई इंतजाम न होने से इनके अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। जनप्रतिनिधियों और अफसरों की अनदेखी से बरेली पर्यटन नगरी बनने से भी वंचित रह गई है।
पिछले सालों में कई जनप्रतिनिधियों ने बरेली की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के लिए बड़े-बड़े वादे तो किए लेकिन वे सिर्फ चुनावी सभाओं के मंचों तक ही सीमित रहे। करीब दो साल पहले एक मंत्री ने लीलौर झील को संरक्षित करने, रामनगर किला की 10 कि लोमीटर तक फैली जमीन पर हो रहे कब्जे हटवाने समेत अन्य स्थानों को पर्यटन स्थल बनाने का वादा किया था लेकिन उस पर अमल आज तक नहीं हुआ। शनिवार को हुई जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक में ‘हृदय’ का कॉलम रिक्त मिलने पर इस पर चर्चा भी नहीं हो सकी। अफसरों ने बताया कि जिले में ऐसी कोई ऐतिहासिक धरोहर नहीं है, जिसका संरक्षण किया जा सके या उसका सौंदर्यीकरण हो सके। लिहाजा हृदय योजना के तहत बरेली को बजट जारी नहीं होता है। अफसरों का यह जवाब भी कई सवाल खड़े करता है।
क्या है हृदय योजना
शहरों की विरासत को संभालने और उसको संरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के तहत साल 2015 में ‘हृदय योजना’ की शुरुआत की है। योजना का उद्देश्य ऐतिहासिक विरासत को संजोने वाले शहरों मेें पर्यटन को बढ़ावा देकर युवाओें को रोजगार और शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना है। इसके तहत शहर के पुराने मंदिरों, घाटों, ऐतिहासिक इमारतों और प्रमुख स्मारकों के विकास के लिए प्लानिंग होती है। साथ ही, शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, होटल्स, शौचालय की व्यवस्था, नगर विकास) को भी बदला जाता है। इसके लिए पूरा फंड केंद्र सरकार अदा करती है।
देश के 12 शहरों का हुआ है चयन
इस योजना के तहत अब तक प्रदेश के मथुरा, वाराणसी समेत देश में 12 शहरों का चयन हुआ है। यहां की ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने के लिए केंद्र सरकार ने पांच सौ करोड़ का बजट जारी कर संरक्षण की कवायद भी शुरू कर दी है। हैरत की बात यह कि बरेली के जनप्रतिनिधियों ने इस योजना से बरेली को जोड़ने के लिए अब तक केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव तक नहीं भेजा है। पिछले करीब पांच साल में केंद्र सरकार को ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए एक भी प्रस्ताव न भेजने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनप्रतिनिधि और अफसर शहर के विकास के लिए कितने संजीदा हैं।
हृदय योजना के तहत बरेली के किसी ऐतिहासिक स्थल को दर्ज कराने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को जनप्रतिनिधियों ने भेजा ही नहीं है, इसलिए बरेली को इस योजना के तहत बजट भी नहीं मिल रहा है। संबंधित मामले में जनप्रतिनिधियों से ऐतिहासिक स्थलों के संबंध में प्रस्ताव तैयार कराने को कहा गया है। - सत्येंद्र कुमार, सीडीओ