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44 साल बाद भौम आयुष्मान योग में होगी यम द्वितीया

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बरेली। भाई दूज या भैया दूज का त्योहार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मंगलवार को मनाया जाएगा। दिवाली के दो दिन बाद होने वाला यह पर्व बहन भाई के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व को यम द्वितीया भी कहते हैं। इस साल 44 साल बाद भौम आयुष्मान योग बन रहा है, जिसमें भाइयों का तिलक लगाने से उनकी आयु बढ़ने के साथ ही कष्ट भी दूर होते हैं। इस बार भाई दूज का शुभ मुहूर्त अपराह्न 1:12 बजे से 3:26 बजे तक रहेगा।
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भाई दूज पूजा विधि
इस दिन भाई बहन का यमुना में स्नान करना विशेष फलदायी होता है। कारण, यमुना मृत्यु के देवता यम की बहन है। अगर यमुना में स्नान कर पाना संभव न हो तो घर पर सुबह उठकर नहाने के बाद तैयार हो जाएं। सबसे पहले बहन भाई दोनों मिलकर यम, चित्रगुप्त और यम के दूतों की पूजा करें और सबको अर्घ्य दें। इसके बाद बहन अपने भाई को घी और चावल का टीका लगाती हैं। फिर भाई की हथेली पर सिंदूर, पान, सुपारी और सूखा नारियल यानी गोला भी रखती हैं। इसके बाद भाई के हाथ पर कलावा बांधकर मुंह मीठा करके अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है। भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं।

इस बार भैया दूज का खास योग 44 साल बाद पड़ रहा है। उनका नाम है भौम आयुष्मान योग भौम भाइयों का कारक है। आयुष्मान आयु बढ़ाने वाला है, इन दोनों के मिलने से भौम आयुष्मान योग बनता है। इस योग में भाइयों का तिलक करने से भाई दीर्घायु होते हैं और उनके सभी कष्ट दूर होते हैं।
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- पंडित राजेंद्र तिवारी, भागवत प्रभाकर
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